नशाखोरी और घरेलू हिंसा - एक विनाशकारी संबंध : डॉ. मनोज अग्रवाल

नशाखोरी और घरेलू हिंसा: एक विनाशकारी संबंध विषय पर बोलते हुए नशामुक्ति के क्षेत्र में कार्य करने वाले प्रमुख समाजसेवी डॉ. मनोज अग्रवाल ने बताया कि - यह एक कड़वा सच है कि नशे की लत न केवल व्यक्ति को बर्बाद करती है, बल्कि उसके परिवार और समाज को भी गहरे घाव देती है।
डॉ मनोज अग्रवाल के अनुसार नशाखोरी का सीधा प्रभाव व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। जब कोई व्यक्ति नशे का आदी हो जाता है, तो उसकी सोचने-समझने की शक्ति कमजोर हो जाती है। वह गुस्सैल, असंवेदनशील और आक्रामक हो जाता है। यही आक्रामकता अक्सर उसके परिवार पर निकलती है। शराब, ड्रग्स और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले लोग अपने जीवनसाथी, बच्चों और माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार करते हैं। कई मामलों में यह शारीरिक हिंसा तक पहुँच जाता है, जिससे परिवार का माहौल भयावह हो जाता है।
डॉ मनोज अग्रवाल ने कहा कि घरेलू हिंसा केवल शारीरिक ही नहीं होती, यह मानसिक और भावनात्मक स्तर पर भी पीड़ित को तोड़ देती है। नशे के कारण आर्थिक संकट गहरा जाता है, घर में अशांति बढ़ती है और बच्चों के कोमल मन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसे माहौल में पले-बढ़े बच्चे या तो डरपोक और असुरक्षित हो जाते हैं या खुद भी गलत रास्ते पर चले जाते हैं।
इस समस्या का समाधान केवल कानून बनाने से नहीं होगा, बल्कि हमें सामाजिक जागरूकता फैलानी होगी। नशे के खिलाफ शिक्षा देनी होगी, पीड़ितों को सुरक्षा और सहायता देनी होगी, और नशे के आदी लोगों को सही मार्ग दिखाना होगा।
डॉ मनोज अग्रवाल जी ने लोगों से आव्हान किया कि आइए, हम सब मिलकर नशाखोरी और घरेलू हिंसा के खिलाफ एकजुट हों। अपने परिवारों को सुरक्षित करें, समाज को स्वस्थ बनाएं और एक उज्जवल भविष्य की ओर कदम बढ़ाएं।




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