बुरहानपुर। जिला मुख्यालय से करीब 50 किमी दूर धूलकोट तहसील के उतांबी गांव में बुधवार देर रात एक भीषण अग्निकांड हुआ। बड़ोले फाल्या इलाके में आधी रात को आग भड़क उठी, जिससे छह आदिवासी परिवारों के कच्चे मकान पूरी तरह जलकर खाक हो गए।
आग इतनी तेजी से फैली कि परिवारों को अपना राशन, कपड़े, आभूषण और बाकी जरूरी सामान तक निकालने का मौका नहीं मिला। इन परिवारों के पास अब न तो सिर छुपाने के लिए घर बचा है और न ही खाने के लिए अनाज। गनीमत रही कि समय रहते सभी लोग सुरक्षित बाहर निकल आए, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। हालांकि, आग बुझाने के तमाम प्रयासों के बावजूद, उसकी लपटों के आगे ग्रामीण बेबस नजर आए।
इस अग्निकांड में सुखलाल बारेला (65 वर्ष), उनके पुत्र कनाराम और राकेश बारेला, सुकमा बाई (पत्नी केसर सिंह) और उनके पुत्र अनिल व सिकनिया सिंह बारेला के मकान जलकर खाक हो गए। परिवारों के अनुसार, वे मजदूरी कर गुजर-बसर करते थे और इस हादसे में उनकी जमा पूंजी, 10 बकरियां और बारिश के लिए संजोकर रखा ज्वार-मक्का भी जल गया।
पीड़ित परिवारों ने जिला प्रशासन से तत्काल राहत पहुंचाने, मकान निर्माण और जीवन यापन के लिए जरूरी सामग्री मुहैया कराने की मांग की है।
हर बार आग बुझाने के लिए नेपानगर या जिला मुख्यालय से दमकल वाहन भेजा जाता है, जो मौके पर पहुंचने में दो से ढाई घंटे लगा देता है। तब तक सब कुछ जलकर राख हो चुका होता है। इस घटना में भी यही हुआ—दमकल वाहन देर से पहुंचा और छह घर पूरी तरह जल चुके थे।
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