बुरहानपुर - शादी और बारातें तो आपने बहुत देखी होंगी, लेकिन घोड़ी पर बैठकर दुल्हन को जाते हुए यह केवल बुरहानपुर के गुजराती मोढ़ वणिक समाज में ही देखने को मिलता है. दरअसल, यह प्रथा राजा महाराजाओं की समय में प्रचलित थी. आधुनिक समय की चकाचौंध में प्राचीन प्रथाएं समाप्त हो गई थी, लेकिन बुरहानपुर के गुजराती मोढ़ वणिक समाज में इसे एक बार फिर से जीवित किया जा रहा है. इस समाज की लड़कियां फिर से इस प्रथा के मुताबिक अपना विवाह रचा रही हैं. इसी कड़ी में दुल्हन साक्षी भगत और दूल्हा पारस मेहता ने इस पर अमल कर सभी हैरान कर दिया है.
यह है परंपरा
गुजराती वाणिक मोढ समाज के राजेश भगत ने बताया यह हमारे समाज की प्राचीन परंपरा है, जिसे कन्या घाटडी कहा जाता है. वैसे तो यह परंपरा समाज में लुप्त हो गई थी, लेकिन समाज की नई जनरेशन को जब अपने समाज की इस परंपरा के बारे में पता चला, तो नई पीढ़ी ने इसे दोबारा शुरू करने का आग्रह किया. इसके लिए बुरहानपुर के नव युगल साक्षी और पारस आगे आए. इस परंपरा में शादी के एक दिन पहले दुल्हन को घोड़ी पर सवार करके गाजे बाजे के साथ दूल्हे के घर या दूल्हे के परिवार की ओर से जहां व्यवस्था की जाती है, उस मैरिज गार्डन तक दुल्हन घोड़े पर सवार होकर पहुंचती हैं, जहां सभी वधु पक्ष के लोगों का वर पक्ष के लोग स्वागत सत्कार करते हैं. फिर दुल्हन घोड़ी से उतर कर दूल्हे को विवाह करने के लिए अपने घर आने का निमंत्रण देती है, जिसे दुल्हा स्वीकार कर दुसरे दिन दुल्हन के यहां विवाह करने पहुंचता है.
साक्षी गोपाल भगत घोड़े पर सवार होकर हाथ में तलवार एक हाथ में तिरंगा झंडा बारात के साथ अपने दूल्हे के घर पहुंची।
सभी देखने वालों ने इस परंपरा की प्रशंसा की।
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