नशाखोरी की वजह से हो रहा परिवारों का विघटन : डॉ. मनोज अग्रवाल

नशाखोरी और परिवार का विघटन विषय पर नशामुक्ति के क्षेत्र में कार्य करने वाले डॉ मनोज अग्रवाल ने बोलते हुए कहा कि -
नशाखोरी आज समाज की एक गंभीर समस्या बन चुकी है, जो न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाती है, बल्कि उसके परिवार और सामाजिक ताने-बाने को भी छिन्न-भिन्न कर देती है। नशे की लत परिवारों को तोड़ने, रिश्तों में दरार डालने और पीढ़ियों को प्रभावित करने का कारण बनती है। यह एक धीमा जहर है, जो व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से खोखला कर देता है।

नशाखोरी के कारण

नशाखोरी के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

1. मानसिक तनाव और अवसाद – जीवन की चुनौतियों, आर्थिक समस्याओं या पारिवारिक कलह के कारण लोग नशे की ओर आकर्षित होते हैं।

2. बुरी संगति – किशोरावस्था में दोस्तों के दबाव में आकर कई लोग नशे की शुरुआत करते हैं।

3. जिज्ञासा और आधुनिकता की दौड़ – युवा वर्ग अक्सर इसे आधुनिकता और स्टेटस सिंबल समझकर अपनाता है।

4. परिवारिक समस्याएँ – माता-पिता के झगड़े, उपेक्षा या गलत परवरिश भी बच्चों को नशे की ओर धकेल सकती है।

5. मीडिया और विज्ञापन – फिल्मों, वेब सीरीज और सोशल मीडिया में नशे को ग्लैमराइज़ करके दिखाया जाता है, जिससे युवा प्रभावित होते हैं।

नशाखोरी से परिवार पर प्रभाव

1. रिश्तों में दरार – नशे की लत व्यक्ति को चिड़चिड़ा, आक्रामक और गैर-जिम्मेदार बना देती है। वह परिवार के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियाँ भूलने लगता है, जिससे आपसी विश्वास और प्रेम समाप्त हो जाता है।

2. आर्थिक संकट – नशे की लत व्यक्ति को आर्थिक रूप से कमजोर बना देती है। वह अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा नशे में बर्बाद करता है, जिससे परिवार की जरूरतें पूरी नहीं हो पातीं।

3. घरेलू हिंसा – नशे की हालत में व्यक्ति हिंसक हो सकता है, जिससे घर में झगड़े और उत्पीड़न की घटनाएँ बढ़ जाती हैं।

4. बच्चों पर दुष्प्रभाव – नशेड़ी माता-पिता के बच्चे मानसिक तनाव, असुरक्षा और अपराध की ओर बढ़ सकते हैं। ऐसे बच्चे अक्सर स्कूल छोड़ देते हैं और असामाजिक गतिविधियों में लिप्त हो जाते हैं।

5. परिवार का विघटन – जब स्थिति अत्यधिक बिगड़ जाती है, तो तलाक, अलगाव और आत्महत्या जैसी घटनाएँ भी सामने आती हैं।

नशाखोरी से बचाव और समाधान

1. परिवार का सहयोग – यदि किसी व्यक्ति में नशे की लत है, तो उसे डांटने या अलग-थलग करने के बजाय सहानुभूति और समर्थन देना चाहिए।

2. शिक्षा और जागरूकता – बच्चों और युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में सही जानकारी दी जानी चाहिए।

3. परामर्श और पुनर्वास केंद्र – नशे की लत छुड़ाने के लिए काउंसलिंग और डिटॉक्सिफिकेशन सेंटर की मदद ली जा सकती है।

4. सकारात्मक माहौल – परिवार में प्रेम, विश्वास और संवाद बनाए रखना आवश्यक है ताकि कोई व्यक्ति नशे की ओर आकर्षित न हो।

5. कानूनी सख्ती – सरकार को नशे के अवैध व्यापार पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए और इसके खिलाफ सख्त कानून लागू करने चाहिए।

निष्कर्ष

नशाखोरी न केवल व्यक्ति को बल्कि पूरे परिवार को बर्बाद कर सकती है। यह समस्या केवल कानून से नहीं सुलझ सकती, बल्कि इसके लिए समाज, परिवार और सरकार को मिलकर काम करना होगा। यदि परिवार मजबूत रहेगा, संवाद बना रहेगा और सही मार्गदर्शन मिलेगा, तो नशाखोरी को रोका जा सकता है। केवल एक व्यक्ति का सुधार पूरे परिवार की खुशहाली लौटा सकता है।


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