जनसुनवाई में किसान ने मांग की मुझे इच्छा मृत्यु की अनुमति देकर मेरी जमीन सरकारी घोषित कर दो

बुरहानपुर - जिले के ग्राम खड़कोद का एक किसान मंगलवार को जनसुनवाई में कीटनाशक लेकर पहुंचा करीब 2 साल से शिकायत करने के बाद किसान के खेत के पास रेत खदान में ब्लास्टिंग होने से किसान की फसल खराब हो रही है ट्यूबवेल बार बार बैठ जाता जिससे किसान परेशान हाल है ग्राम खडकोद के किसान धनराज चंदनकर की ग्राम खडकोद में खनिज विभाग द्वारा गिटटी खनन के लिए पटटे दिए गए है जहां खदान मालिक दिन रात डायनामाईट लगाकर खदानो में खनन कर रहे है तथा गिटटी के्रश कर रहे है, जिस खदानों से लगे खेतों में फसलों पर दुष प्रभाव पड फसले खराब हो रही है वहीं किसानों के टयूबवेल और कुओं का जल स्तर भी प्रभावित हो रहा है, इस को लेकर प्रभावित किसान खनिज विभाग को दो वर्षो से निरंतर शिकायत कर खदान बंद करने की मांग कर रहे है साथ ही इस पूरे मामले की शिकायत भी सीएम हैल्पलाईन में जनसुनवाई में की गई लेकिन कोई कार्यवाही नही हो रही है, इस मामले को फिर एक बार जनसुनवाई में पहुंचे किसान बंधुओं ने कीटनाशक भी साथ लाया और निराकरण नही होने पर कीनटनाशक पीकर अपनी जीवन लीला समाप्त करने की बात कही खडकोद निवासी किसान बंधुओं के कीटनाशक पीने के अल्टीमेटम पर जिला प्रशासन हरकत में आया और तुरंत मामले पर कार्यवाही करते हुए खनिज अधिकारी को जांच के आदेश एडीएम सोलंकी ने दिए किसान बंधुओं का कहना है कि गिटटी खदान में ब्लास्टिंग होने तथा क्रेशन मशीन से धूल उडने से सभी प्रकार की फसले नष्ट हो रही है तथा टयूबवेल और कुंए का जल स्तर भी प्रभावित हो रहा है उन्होने मांग की के मामा का बुलडोजर खनन माफीयाओं पर चले जो वैध अवैध रूप से खनन कर किसानों को नुकसान पहुंचा रहे है धनराज संतोष चंदनकर का साडे चार एकड़ का खेत है तीन खदानों से घिरा हुआ है अभी केली के पांच हजार पौधे लगे हुए हैं  लेकिन इस पर चारों तरफ धुल जमी है इस कारण उपज खराब हो रही है लुंगार टूट कर गिर रहे है ऐसी फसल लेने को व्यापारी  तैयार नहीं संतोष में छह के सात लाख रूपये खर्च करके हाल ही में खेत मे दो ट्यूबवेल करवाएं दोनों में भरपूर पानी निकला लेकिन खजाना में ब्लास्टिंग होते ही दोनों ट्यूबवेल के जल स्त्रोत बंद हो गए यह पूरी तरह सूख गए पिछले चार-पांच साल से बारा लाख रुपए लगा कर नुकसान झेल रहा हूं सेवा सहकारी समिति सहित बाहर से सात लाख कर्ज ले चुका हूं चेहरा गमगीन आंखें नाम होते हुए संतोष ने बताया कि खेती ही 6 लोगों के परिवार का गुजर-बसर है लेकिन खदानों में हो रही ब्लास्टिंग ने सब कुछ बर्बाद कर दिया अब जान देने के अलावा कुछ नहीं बचा इसीलिए उसने जनसुनवाई में प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि हमारे खेत को शासकीय जमीन में ले लो या मुझे इच्छा मृत्यु की अनुमति दे दो

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