तुलसी और विष्णु के प्रेम के पीछे एक कहानी है. दरअसल तुलसी का विवाह विष्णु के ही दूसरे रूप शालिग्राम से देवउठनी एकादशी पर संपन्न हुआ था. इसके साथ ही हफ्ते के सभी दिन एक जैसे नहीं माने गए हैं. जैसे मंगलवार और शनिवार को क्रूर माना गया है तो इस दिन भी तुलसी के पत्ते नहीं तोड़े जाते हैं वहीं रविवार के दिन तुलसी को जल देना निषेध किया गया है.
ऐसा माना जाता है कि रविवार के दिन ही तुलसी का विवाह शालिग्राम से हुआ था और वो अपने पति के लिए इसी दिन व्रत रखती हैं. ऐसे में इस दिन उन्हें जल नहीं चढ़ाना चाहिए. साथ ही ये माना जाता है कि विष्णु भगवान को तुलसी और रविवार का दिन दोनों प्रिय है और इस दिन उसमें जल नहीं पड़ना चाहिए. भगवान विष्णु को तुलसी प्रिय बनाने का श्रेय भगवान गणेश को जाता है. गणेश जी के वरदान से ही तुलसी कलयुग में भगवान विष्णु और कृष्ण जी की प्रिय बनी और जगत को जीवन और मोक्ष देने वाली भी बनी. जैसे रविवार के दिन तुलसी के पत्तों को तोड़ा नहीं जाता उसी प्रकार से गुरुवार के दिन तुलसी का पौधा लगाना चाहिए. साथ ही इसे घर के बाहर नहीं बल्कि आंगन के बीचों बीच लगाना शुभ माना जाता है. अगर आप कार्तिक महीने में तुलसी के पौधे को अपने घर में लगाते हैं तो इससे विशेष फल मिलता है.
विष्णु जी को तुलसी प्रिय बनाने के पीछे गणेश जी को माना जाता है. उनके वरदान से ही तुलसी को कलयुग में भगवान विष्णु और कृष्ण प्रिया बनने का मौका मिला साथ ही संपूर्ण जगत को मोक्ष देने का वरदान भी प्राप्त हुआ, लेकिन गणेश ने अपनी पूजा में तुलसी का प्रयोग निषेध रखा है. इस वजह से गणेश जी की पूजा में तुलसी का प्रयोग नहीं होता है, जबकि विष्णु भगवान की पूजा में उनका प्रयोग सर्वोत्तम माना गया है.