लोकसभा ने बाल विवाह निषेध संशोधन विधेयक को स्थायी समिति को भेजा

बाल विवाह निषेध (संशोधन) विधेयक 2021 आज लोकसभा में विपक्षी सदस्यों के विरोध के बीच पेश किया गया। इसमें लड़कि‍यों के लिए विवाह की आयु सीमा को 18 से बढ़ाकर 21 किए जाने का प्रस्ताव है।

सदन में विधेयक पेश करते हुए महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी ने कहा कि यह कानून, विवाह में सभी धर्मों और जातियों की महिलाओं को समानता का अधिकार प्रदान करेगा।

श्रीमती ईरानी ने कहा कि विधेयक की पुन स्‍थापना ऐतिहासिक है साथ ही यह ,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दृढ संकल्प को दर्शाता है कि महिलाओं के प्रति किसी भी कीमत पर भेदभाव नहीं किया जा सकता।

श्रीमती ईरानी ने कहा कि महिलाओं के स्वाभिमान की रक्षा के लिए विधेयक आवश्‍यक है। उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र हालांकि विवाह में पुरुषों और महिलाओं को समान अधिकार प्रदान करने में 75 वर्ष की देर कर रहा है लेकिन अब इस विधेयक के साथ इस गलती में सुधार किया जा रहा है।

और हम देश के इतिहास में पहली बार पुरुषों और महिलाओं को, विवाह तय करने की दिशा में समान अधिकार प्रदान करने का काम कर रहे हैं। 

श्रीमती ईरानी ने कहा कि यह विधेयक सभी धर्मों की लड़कियों की विवाह की उम्र में एकरूपता सुनिश्चित करता है, साथ ही महिलाओं के साथ भेदभाव करने वाली किसी भी परम्‍परा या कानून को तोड़ता है।

उन्‍होंने कहा कि इससे 15 से 18 वर्ष की आयु की 10 प्रतिशत विवाहित लड़कियों के गर्भपात के कारण होने वाली मौतें नहीं होंगी।

उन्होंने यह भी कहा कि विवाह की उम्र बढ़ाना अब बहुत आवश्‍यक इसलिए भी है क्योंकि 2015 से 2020 के दौरान देश में 20 लाख बाल विवाह रोके गए हैं।

विधेयक पेश करने का कांग्रेस, द्रमुक, राष्‍टवादी कांग्रेस पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, एआईएमआईएम, आईयूएमएल, शिवसेना और बीजू जनता दल के सदस्यों ने विरोध किया। विपक्षी सदस्यों ने मांग की कि इसे संसद की स्थायी समिति के पास भेजा जाना चाहिए।

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी और गौरव गोगोई ने सरकार पर अनावश्यक जल्दबाजी में विधेयक लाने का आरोप लगाया और कहा कि इसे जांच के लिए संसद की स्थायी समिति के पास भेजा जाना चाहिए।

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