खंडवा। "अंतर्राष्ट्रीय बेटी दिवस" के अवसर पर ककस (कवि कला संगम) एवं सभ्रांत समाज भारत के तत्वावधान में बेटियों का पूजन कर सभ्रांत समाज के 40 उद्देश्यों में से एक उद्देश्य" जाति-धर्म भेद भाव रहित मानव समाज की स्थापना विषय पर भी काव्य संगोष्ठी एवं परिचर्चा का आयोजन आनन्द नगर स्थित जोशी भवन में किया गया। यह जानकारी देते हुए ककस प्रवक्ता निर्मल मंगवानी ने बताया कि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि लव जोशी, कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. जगदीश चौरे ने की। अतिथियों का स्वागत व चर्चा परिचर्चा, रचनापाठ हेतु पधारे साहित्यिक मनिषियों का स्वागत रंजना जोशी ने किया। इस अवसर पर अमेरिका से अपने स्वदेश पधारे तारकेश्वर चौरे जी का अभिनन्दन शाल श्रीफल भेंट कर किया गया। शाम्भवी जोशी, सलोनी सेन आदि सहित उपस्थित सभी बहन-बेटियों का पूजन कर स्वागत किया गया।
शब्दाक्षर पंजीकृत संस्था के जिलाध्यक्ष, अर्थ मंत्री, प्रचार मंत्री बनने पर दीपक चाकरे, निर्मल मंगवानी, सलोनी सेन का पुष्पगुच्छ एवं मालाओं से स्वागत किया गया।अंतर्राष्ट्रीय बेटी दिवस के मौके पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार डॉ जगदीश चौरे ने कहा कि यह दिवस सभी बेटीओ को प्रोत्साहित करने और उनके अधिकार के लिए मनाया जाता हैं। एक बेटी अपने परिवार को संभालती हैं साथ ही आज बेटियों ने अपने मेहनत के दम पर समाज में अपना अलग ही नाम हासिल किया हैं, वही हर क्षेत्र में बेटियाँ, लड़कों से कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है। इसके पश्चात परिचर्चा व रचना पाठ हुआ विजया जोशी ने कहा कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के साथ माताओं का दायित्व भी उन्हें अच्छे संस्कार देना होता है। इसी तरह उन्होंने कहा कि जाति धर्म भेदभाव रहित मानव समाज की स्थापना आवश्यक है किंतु अपने धर्म का पालन करते हुए। तारकेश्वर चौरे ने कहा कि वैदिक सिद्धान्त के अनुसार भी एक ही जाति मानी जाती है और वह है मनुष्यता। अपने सम्मान हेतू धन्यवाद अदा किया। मुख्य अतिथि लव जोशी ने भी बेटीयो को बधाई देते हुए जाति धर्म भेद रहित मानव समाज की स्थापना पर कहा कि भगवान श्री राम जी भी मर्यादा पुरुषोत्तम इसी लिए कहे गए कि वे सब को एक दृष्टि से देखते थे, जाति धर्म से पहले हम मानव है। आध्यात्मिक उदारहण हमारे सम्मुख है। सभ्रांत समाज के राष्ट्रीय सचिव सुनील उपमन्यु ने कहा कि जाति, धर्म के बारे में बच्चा जन्म के समय क्या जाने उसे तो बड़े होने पर यह बताया जाता है कि हमारी जाति धर्म क्या है, फिर यही से चालू होती है समस्याएं। अतः जन्म लेते ही, बड़े होते ही उसे यह कहा जाए कि हमारा जाति धर्म मानवता का है फिर देखिए समाज कैसे उन्नति की ओर अग्रसर होता है। उभरती कवियित्री सलोनी सेन ने बेटी पर रचनापाठ करते हुए जाति धर्म पर बेबाक टिप्पणी कर कहा कि प्रथम दृष्टि में हम मानव है, उन्होंने कहा कि इस विषय पर काफी बहस होना चाहिए। साहित्य प्रकोष्ठ की प्रदेश उपाध्यक्ष जयश्री तिवारी ने चर्चा में भाग लेते कहा कि बिल्कुल जाति धर्म भेद रहित मानव समाज होना चाहिए। रंजना जोशी ने बेटी पर रचना सुना कर माहौल को बेटी मयी कर दिया, उपस्थित सभी को अपनी बेटियां याद आ गयी। चर्चा में भी सभी का मत रहा कि पहले हम मनुष्य है। प्राचार्या अनिता पिल्लई ने भी बेटी पर काव्य पाठ कर, अपने विचार व्यक्त किए। दीपक चाकरे व निर्मल मंगवानी ने भी रचना पाठ कर अपने विचार व्यक्त किए। वर्षा उपाध्याय, कृष्णा पगारे, नमिता चौरे ने बेटीयो पर अपनी सुंदर रचना सुना अंतर्राष्ट्रीय बेटी दिवस को सार्थक किया। अंत मे डॉ जगदीश चन्द चौरे जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज बेटीयो को पूज कर हम पूण्यई हो गए। जाति धर्म के लिए क्या झगड़े, प्रेम के मानव की बात करे। कार्यक्रम का संचालन सुनील उपमन्यु एवं आभार जयश्री तिवारी ने माना।
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