ईशा पूर्व बसा प्राचीन नगर ब्रह्मपुर (बुरहानपुर )अनेक हिन्दू राजाओ ने शासन किया सन् 1305 ई तक राजस्थान के चौहान वंश का शासन था सन् 1305 ई. के बाद फरूकी वंश का ब्रह्मपुर पर शासन हो गया फारुकी बादशाह ने इसका नाम बुरहानपुर रख दिया फारुकी काल से बुरहानपुर कहा जाने लगा फिर समय के चक्र के साथ काल चक्र बदलता गया सन् 1600 ई. मे मुगल बादशाह अकबर ने बुरहानपुर पर कब्जा कर लिया मुगलकाल मे बुरहानपुर को (दारा सुरूर बुरहानपुर )कहा जाने लगा मुगलकाल मे बुरहानपुर टकसाल (Mint) से 18 राजाओ ने अपने - अपने नाम से सिक्के निकाले थे | सन् 1760 ई. मे फिर मराठा वीर योद्धा पुना के पेशवा वंश का कब्जा हो गया महाराजा पेशवा ने अपने कर्मठ बहादुर सेनापति श्री महाद जी शिंदे (सिंधिया ) को उपहार के रूप मे ग्वालियर दुर्ग की कमान सौंपी थी ग्वालियर महाराजा सिंधिया का शासन ग्वालियर से बुरहानपुर (ब्रह्मपुर ) तक था| सन् 1778 ई. से महाराजा महाद जी सिंधिया ने अपने से बुरहानपुर टकसाल से सिक्के जारी किए थे सिंधिया वंश के पाँच राजाओ सिक्के निकले थे| फिर बुरहानपुर पर अंग्रेज़ ब्रिटिश शासन हो गया था /
इस प्राचीन नगरी बुरहानपुर मे पर्यटन के क्षेत्र से पुरातत्व महत्व कि ई. पूर्व से लेकर अनेक राजाओ का इतिहास अपने आंचल मे समेटे हुए है आज भी ताप्ती नदी, मोहना नदी तथा निर्माण कार्य के उत्खनन मे ई. पूर्व के पंच मार्क तथा उज्जयिनी सिक्के एवम् फारूक की, मुगलकाल, ब्रिटिश राज के सिक्के मिलते है तथा अनेक प्राचीन सामग्री हमारे बुरहानपुर की नागपुर संग्रहालय मे शोभा बढ़ा रही है और राज्य प्रशासन के पास भोपाल मे बुरहानपुर से उत्खनन के कार्य निकले सिक्के जमा है यदि बुरहानपुर मे
"पुरातत्व संग्रहालय "
बन जाये तो यह सभी सामग्री बुरहानपुर संग्रहालय की शोभा बढ़ायेगी
30 जुलाई सन् 1995 ई . को मध्यप्रदेश सरकार के माननीय मंत्री श्री तनवंतसिंह जी कीर , विधायक सु श्री डॉ. फिरोजा अली, आदरणीय श्री डॉ. पी. जी. वैद्य जी ने वर्तमान स्टेडियम भवन मे बुरहानपुर पुरातत्व संग्रहालय का लोकार्पण किया तब से आज तक बुरहानपुर पुरातत्व संग्रहालय को भवन नसीब नही हो सका
सन् 1992 ई. मे बुरहानपुर मे अपर कलेक्टर माननीय श्री धर्माधिकारी के आग्रह पर पुरातत्व वस्तुओ की सफल प्रदर्शनी का आयोजन भारतीय स्कूल मे किया गया बुरहानपुर के इतिहास व पुरातत्व संरक्षक आदरणीय डॉ. मेजर एम के गुप्ता जी, आदरणीय बहन डॉ. मालती प्रजापति, श्री होशंग जी हवलदार, स्व. श्री नयन जी कापडिया , श्री विजय पाटीदार,श्री रमेश जी पाटीदार, श्री चंद्रभानसिह जी वर्मा , वैद्य सुभाष माने एवम् अन्य बुरहानपुर पुरातत्व प्रेमीयो के अनुरोध पर कुंडी भंडार के अंदर बरीक लकड़ी से बने डाले (टोकरी )को रस्सी बांध कर निचे जल स्त्रोत की संरचना देखी थी फिर उसके बाद कुंडी भंडारे मे लिफ्ट लगाई गई है
अतः बुरहानपुर के सभी सम्मानीय आदरणीय जनप्रतिनिधियो , बुरहानपुर जिला पुरातत्व समिति के अध्यक्ष माननीय कलेक्टर श्री प्रवीण सिंह जी, एवम् सभी सम्मानीय पुरातत्व समिति के समस्त सदस्यगण, से निवेदन है कि शीघ्र अति शीघ्र
"बुरहानपुर पुरातत्व संग्रहालय " के नये भवन के लिए राज्य सरकार व केन्द्र पुरातत्व विभाग से मांग करे।
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