कुछ अभिनेता अपनी एक्टिंग के साथ साथ एक विशेष डायलॉग डिलेवरी से दर्शकों में अपनी पहचान बना लेते हैं उन्हीं में से एक थे - प्रसिद्ध अभिनेता, निर्देशक और लेखक उत्पल दत्त।
उत्पल दत्त ने अपने अभिनय की शुरुआत अंग्रेजी नाटकों को लिखने और उनमें अभिनय करने से की थी। वे Indian People's Theatre Association (IPTA) के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। अंग्रेजी के बाद उन्होंने बंगला भाषा मे नाटक लिखे और बंगाली फिल्मों में अभिनय किया। महान निर्देशक सत्यजीत रे ने अपनी कई फिल्मों में इनके अभिनय का लाभ लिया। बंगाली फिल्मों में स्थापित होने के बाद उत्पल दत्त हिंदी फिल्मों में अभिनय करने मुंबई आ गए।
सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की पहली फ़िल्म 'सात हिंदुस्तानी' में वे भी एक थे। वास्तव में वे इस फ़िल्म में मुख्य भूमिका में थे।
1969 में मृणाल सेन निर्देशित हिंदी फिल्म "भुवन सोम'' में इनका अभिनय इतना सराहा गया कि इन्हें इस फ़िल्म में श्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
इन्हें हिंदी सिनेमा में सही पहचान मिली ऋषिकेश मुखर्जी निर्देशित सुपर हिट फिल्म "गोलमाल" से। इस फ़िल्म के मूंछ प्रेमी भवानी शंकर के किरदार को इन्होंने अमर कर दिया। इस फ़िल्म में उनके "अच्छा...." बोलने का अंदाज उनका ट्रेडमार्क बन गया । आज भी जब कोई मिमिक्री आर्टिस्ट जैसे ही उसी स्टाइल में 'अच्छा' बोलता है तो दर्शक समझ जाते है कि अब उत्पल दत्त की बात होने वाली है।
1980 में उत्पल दत्त को फ़िल्म गोलमाल के लिए श्रेष्ठ हास्य कलाकार का फ़िल्म फ़ेयर अवार्ड मिला। इसके बाद इन्हें 1982 और 1984 में क्रमशः ऋषिकेश मुखर्जी निर्देशित फिल्म नरम गरम और रंग बिरंगी के लिए के लिए फिर से श्रेष्ठ हास्य कलाकार के फ़िल्म फ़ेयर पुरुस्कार से सम्मानित किया गया।
फ़िल्म फ़ेयर अवार्ड्स के इतिहास यह भी एक रिकॉर्ड होगा कि एक ही डायरेक्टर के निर्देशन में बनी तीन फिल्मों (गोलमाल, नरम गरम और रंग बिरंगी) में श्रेष्ठ हास्य कलाकार के लिए के लिए एक ही कलाकार को पुरुस्कृत किया गया।
हास्य अभिनय के अलावा कुछ फिल्मों में उत्पल दत्त में खलनायक के किररदार भी निभा कर यह साबित कर दिया कि वे एक संपूर्ण अभिनेता हैं।
- विजय सोहनी
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