इंसान किसी के प्रति इतनी चाहत और दीवानगी रख सकता है कि उसे भगवान का दर्जा भी दे सकता है और ईश्वर के तुल्य पूज्य बना सकता है।
समय समय पर अनेकों उदाहरण हमारे सामने आते रहते हैं।
ऐसा ही एक मामला पिछले 33 वर्षों से निरंतर जारी है।
मध्य-प्रदेश के खरगोन जिले के झिरनिया क्षेत्र के वनग्राम पाडल्या में करीब 33 वर्षों से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का मंदिर अब भी आस्था का केंद्र बना हुआ है। इंदिरा गांधी द्वारा वनवासियों के हित में किए गए कई कार्यों से उन्हें वे देवी तुल्य मानकर क्षेत्र रहवासी अब भी उनकी प्रतिमा का पूजन करते हैं।
यही कारण है कि इंदिरा गांधी की प्रतिमा स्थापित कर मंदिर बनाया गया है उसमें पूजा भी की जाती है।
इंदिरा गांधी के प्रति आदिवासियों में देवी जैसी आस्था थी आज भी है क्योंकि उनका मानना है कि उन्होंने आदिवासियों के लिए कई योजनाएं चलाई, यही कारण है कि आदिवासियों के दिल में इंदिरा गांधी एक राजनेता के तौर पर नहीं बल्कि भगवान के रूप में वास करती है.'
इंदिरा गांधी की प्रतिमा तत्कालीन कांग्रेस विधायक चिड़ा भाई डावर ने गांव वालों आदिवासी समाज के लोगों की इच्छा के मुताबिक 14 अप्रैल 1987 को प्रतिमा स्थापित कर मंदिर बनवाया था. यह प्रतिमा जयपुर से मंगाई गई थी।
इस मंदिर का लोकार्पण तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुनसिंह ने किया था।
इंदिरा गांधी को दिया है सती का दर्जा
यहां के 'आदिवासी समाज में एक परंपरा चली आ रही है कि जब किसी महिला की असमय मृत्यु होती है तो उसे सती का दर्जा भी दिया जाता है देश की पूर्व प्रधानमंत्री के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ था, इसलिए आदिवासियों ने उन्हें सती का दर्जा देते हुए प्रतिमा स्थापित की थी. इस प्रतिमा स्थल पर नियमित रूप से पूजा होती है,
इतने वर्षों से यहां न आस्था में कमी आई और न पूजा का सिलसिला रुका। आज भी 'देवी मां इंदिरा' नाम के जयकारे लगाए जाते हैं।