गाउट क्या है ?
हमारे द्वारा किये गए भोजन के पाचन के पश्चात शरीर मे कई तरह के तत्व बनते है, जिनमे से एक यूरिक एसिड है. यह यूरिक एसिड ही जोड़ों में होने वाले गठिया रोग का कारक है. यह यूरिक एसिड जब हड्डियों के जोड़ों में जमा हो जाता है, तो गठिया का रूप ले लेता है.
गाउट का क्या कारण है ?
रक्त पूरे शरीर में घूमता है, और अपशिष्ट पदार्थ को इकट्ठा कर इसे गुर्दे तक ले जाता है - जहां इसे शुद्ध किया जाता है।
आप जो खाते हैं उसमें बहुत अधिक यूरिक एसिड होता है - गुर्दे इसे फ़िल्टर नहीं कर सकते हैं और इसे मूत्र के माध्यम से समाप्त करने के लिए मूत्राशय में भेज सकते हैं।
अतिरिक्त यूरेट क्रिस्टल आपके जोड़ में जमा हो जाते हैं, जिससे गठिया के हमले की सूजन और तीव्र दर्द होता है।
गाउट होने पर क्या खाना चाहिए ?
● गठिया रोग में संतुलित, आसानी से पचने वाला भोजन जैसे- चोकर युक्त आटे की रोटी, छिलके वाली मूंग की दाल खाएं।
● गेहूं, जई, मक्का, राई, जौ, बार्ली, बाजरा, कनारी बीज आदि अनाजो का सेवन करें |
● गठिया रोग में फलो और सब्जियों में सहिजन, बथुआ, मेथी, सरसों का साग, ककड़ी, लौकी, तुरई, पत्ता गोभी, परवल, गाजर,आलू, शकरकंद, अदरक, करेला, लहसुन का सेवन करें।
● गठिया रोग में सेम और अन्य फलीदार सब्जियों (बींस), चेरी, मशरूम, ओट्स, चौलाई, संतरा, भूरे चावल, मेथी, सोंठ, नाशपाती, कद्दू, अंडा, (सोया मिल्क, सोया बडी, सोया पनीर, टोफू आदि) पपीता, ब्रोकली, लाल शिमला मिर्च, अजवायन, अनानास, अनार, अंगूर, आम, एलोवेरा, आंवला, सेब, केला, तरबूज, लहसुन, आलूबुखारा, स्ट्रॉबेरी
● डेयरी पदार्थ जैसे दूध और दूध से बने उत्पाद (दही, पनीर आदि ) कैल्शियम का अच्छा स्रोत है इन्हें आप ले सकते है लेकिन बेहतर यह होगा की आप गठिया रोग में दूध-दही भी कम मात्रा में ही लें। कैल्शियम की पूर्ति फलों और सब्जियों से करें |
● गठिया रोग में अधिक पानी युक्त फल जैसे खरबूजा, तरबूज, पपीता, खीरा अधिक खाएं।
● कद्दू (पेठे) का जूस, गुड़, अंकुरित अनाज, साबूदाना भी अपनी रुचि के अनुसार सेवन करें।
● गठिया रोग में बादाम, अखरोट, काजू, मूंगफली आदि भी खाएं |
● तेल में- जैतून का तेल, अलसी का तेल, मछली का तेल और borage seed oil.
◆ चाय में ग्रीन टी और तुलसी की चाय
● गठिया रोग में हींग, शहद, अश्वगंधा और हल्दी भी लाभकारी है |
● एक वर्ष पुराने चावल, परवल, करेला, और सहजन की सब्जी का प्रयोग अधिक करें।
किन्हें है गाउट का ज्यादा खतरा ?
मेयो क्लिनिक के अनुसार, अधिक वजन होने से गाउट विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है। वजन कम करने से गाउट का खतरा कम होता है। शोध से पता चलता है कि कैलोरी की संख्या को कम करना इससे बचने का आसान तरीका है।
