कोरोना के डर व लॉक डाउन के चलते कोरोना मरीज और उनके परिजनों में मानसिक विकृतियां आ रही हैं। बीमारी, मृत्यु और आर्थिक नुकसान से बढ़ रहे तनाव और डर के लक्षण देखने को मिल रहे हैं। इसलिए अपनी शारीरिक सेहत के साथ मानसिक सेहत का ख्याल भी जरूर रखें।
ऐसे लोगों के लिए मनोवैज्ञानिकों के इस टिप्स बेहद काम आएंगे, जो यादों को भुलाने में कारगर साबित होते हैं।
1. बुरे विचारों को दूर भगाएं
आप अपने मस्तिष्क से उन चीजों को मिटा सकते हैं जिनकी आपको जरूरत नहीं है या आप नहीं चाहते हैं। जैसे ही आप को बीती बातें याद आएं आप वह सोचने से इनकार कर दें।
मस्तिष्क के प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स हिस्से में यह क्षमता होती है। दिमाग का यही हिस्सा हमें अनुचित कार्य से भी रोकता है। पर जिस तरह कुछ लोग अपने बुरे बर्ताव को रोकने में दूसरों की तुलना में ज्यादा सक्षम होते हैं, उसी तरह कुछ लोग अपनी यादों को दबाने में भी बेहतर होते हैं। पर अगर आप प्रैक्टिस करेंगे तो आप यादों को भुला देंगे।
2. कुछ नया सोचें
सिर्फ बुरी यादों को सिर्फ दिमाग के डस्टबिन में भेजने से काम नहीं चलेगा। आप कुछ नया सोचने का प्रयास करें। अपनी अच्छी यादों के बारे में सोचें। अपनी यादगार यात्रा, अच्छे अनुभवों को दिमाम में दोहराएं।
3. यादों से जुड़े लोगों से दूरी बना लें
अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति से मिलने वाले हैं जो आपको पिछले बुरे अनुभवों की याद दिलाएगा तो बेहतर होगा कि ऐसे लोगों से कुछ समय के लिए दूरी बना लें। वहीं दूसरों को माफ करना सीखें। इससे भी आप बुरी यादों से दूर होंगे।
मेडिटेशन हमें मानसिक रूप से स्वस्थ रखने में हमारी मदद करता है, वहीं नकारात्मक विचार भी मन में नहीं आते जिससे हम मानसिक रूप से खुद को स्वस्थ तो रख ही सकते हैं, साथ ही सूकून भी मिलता है मेडिटेशन से कई फायदे होते हैं, जैसे भावनात्मक स्थिरता में सुधार, रचनात्मकता में वृद्धि, प्रसन्नता में संवृद्धि, मानसिक शांति एवं स्पष्टता, परेशानियों का छोटा होना आदि।
5. सोशल मीडिया से दूरी बनाएं -
अगर आप इन खबरों से व्याप्त नकारात्मकता से बचना चाहते हैं तो सबसे पहले सोशल मीडिया से दूर हो जाएं, क्योंकि दिन-रात सिर्फ यही खबरें पढ़ व सुनकर आप परेशान हो सकते हैं इसलिए दूरी ही भली।
6. अकेले न रहें, परिवार के साथ समय बिताएं -
इस समय खुद को मोबाइल के साथ ही व्यस्त न रखें बल्कि अपने परिवार के साथ वक्त बिताएं। अगर आप अकेले बैठते हैं तो कई तरह के विचार मन में आते हैं अत: इनसे बचें और परिवार के साथ समय बिताएं।
7. मनपंसद म्यूजिक सुनें -
कहते हैं संगीत स्ट्रेस बूस्टर का काम करता है इसलिए म्यूजिक जरूर सुनें। यदि रात में नींद नहीं आती है और बुरे ख्याल परेशान कर रहे हैं तो इस समय भी अपने पसंदीदा संगीत को सुना जा सकता है।
8. अपनी रुचि (हॉबी) को करें पूरा -
एक महत्वपूर्ण तरीक़ा ये है कि इस समय का इस्तेमाल अपनी हॉबी पूरी करने में करें. वो मनपसंद काम जो समय न मिलने के कारण आप ना कर पाए हों. इससे आपको बेहद ख़ुशी मिलेगी जैसे कोई अधूरी इच्छा पूरी हो गई है.
9. खुद को “री-डिस्कवर” करें
वर्तमान समय मे कोरोना के कारण हम खुद के करियर, परिवार, पढ़ाई और जॉब को लेकर बहुत नेगेटिव सोचने लगते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक ऐसी स्थित में खुद को री-डिस्कवर करना बहुत कारगर साबित हो सकता है। खुद को री-डिस्कवर करना मतलब खुद के बारे में सोचना, जैसे- आप कौन हैं, आपकी काबिलियत क्या है, आप क्यों जरूरी हैं। ऐसा करने से कॉन्फिडेंस वापस आता है और एंग्जाइटी लेवल कम हो जाता है।
10. नौकरी या काम पूरा ना होने को लेकर ज्यादा न सोचे
इस वक्त पूरी दुनिया में अनिश्चिता का माहौल है। हर कोई मुश्किलों का सामना कर रहा है और अपने आर्थिक हालात को सुधारने की कोशिश कर रहा है, लेकिन नौकरी या काम के बारे में ज्यादा और बार-बार सोचना मानसिक सेहत के लिए सही नहीं है।
11. नींद और कसरत
भरपूर नींद और कसरत आपके दिमाग और मन को शक्ति ही प्रदान नहीं करते हैं बल्कि इम्युनिटी पावर भी डेवलप करते हैं। हमारी नींद सबसे बड़ी डॉक्टर है। चिंता और भय से घिरे मनुष्य की नींद कम हो जाती है। इसलिए जब भी सोने का मौका मिले जरूर सो जाएंगे भले ही झपकी लें लें।
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