ड्राई आई (Dry Eye) की वजह से आंखों की रोशनी तो कमजोर होती ही है, बल्कि अन्य कामों पर भी असर पड़ता है. ड्राई आई की वजह से मरीज डिप्रेशन में भी जा सकता है.
आधुनिक जीवनशैली के साथ ही कामकाज का दबाव भी बढ़ा है. इस बीच लोग स्मार्टफोन पर भी आजकल घंटों वक्त बिताते हैं.
लैपटॉप या कंप्यूटर पर घंटों काम करना, टीवी पर काफी देर तक अपने पसंदीदा शो देखना, यह सब आंखों पर असर डालता है. इस दौर में सबसे बड़ी समस्या ड्राई आई यानी आंखों में सूखेपन की है.
ड्राई आई के बारे में और जानें -
यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें आंखें पर्याप्त मात्रा में आंसू नहीं बना पाती हैं या फिर उनकी गुणवत्ता अच्छी नहीं होती है. ड्राई आई की वजह से आंखों की रोशनी तो कमजोर होती ही है, बल्कि अन्य कामों पर भी असर पड़ता है. ड्राई आई की वजह से मरीज अवसाद में भी जा सकता है. उनके दैनिक कार्यों पर असर पड़ता है. डायबिटीज व दिल से जुड़ी समस्याओं वाले लोगों में यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है.
इन बातों का रखें ध्यान : -
● बार-बार पलकें झपकें – यदि आप कंप्यूटर या लैपटॉप पर काम करते हैं. घंटों स्मार्टफोन पर समय बिताते हैं तो समय-समय पर आंखें झपकाते रहें. वैसे तो पलकें अपने आप झपकती रहती हैं, इसके बावजूद बीच-बीच में कुछ सेकेंड के लिए आंखों को बंद करके आराम देते रहें. एसी कमरे में वाष्पीकरण की दर बढ़ जाती है, जिसकी वजह से आंसू कम बनते हैं और ड्राई आई की समस्या सामने आती है. उचित रोशनी में काम करें और कंप्यूटर या स्मार्टफोन की ब्राइटनेस भी कम रखें.
● टियर ड्रॉप का इस्तेमाल करें – आखों में नमी बनाए रखने के लिए डॉक्टर की सलाह से टियर ड्रॉप का इस्तेमाल करें. यह आईड्रॉप आपको मेडिकल स्टोर से आसानी से मिल जाती हैं.
● धूम्रपान से बचें – धूम्रपान ना करें, क्योंकि इससे ड्राई आई की समस्या बदतर हो सकती है.
● स्वस्थ भोजन करें – हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें, इससे आखों की सेहत बनी रहती है.