बुरहानपुर - असीरगढ़ की तलहटी में, खूबसूरत वादियों में खड़ा हुआ एक सुंदर सा पुराना महल मोती महल जिसे शाहजहां ने बनवाया था।
यह आसिर गढ़ रेस्ट हाउस से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर है। खूबसूरत मोड़ों से बना हुआ रास्ता मोती महल गांव से लगा हुआ, यह महल बहुत ही रमणीय है।
पांधर नदी के किनारे शाहजहां ने एक सुंदर सा डैम बनवाया था जिसमें पानी रुका करता था और फव्वारे और बगीचों का इंतजाम किया था।
पांधर नदी के किनारे की बावड़ी में आज भी लगातार 12 महीने पानी रहता है। हालांकि डैम में दरार हो जाने से नदी का पानी रुकता नहीं है। बहुत ही सुंदर बने हुए इस महल की मध्य प्रदेश आर्कोलॉजी देखरेख करता है। इसका पवेलियन बहुत खूबसूरत है आज भी मई के महीने में इस दरबार हॉल में बैठे तो वहाँ इस प्रकार के झरोखे बनाए गए हैं कि गर्म हवा भी अंदर आती है तो वह भी शीतलता प्रदान करती है।
खूबसूरत दो गुम्बज आज भी महल की खुबसूरती को बयां करते है। इस महल के झरोखे दर्शनीय है। मोती महल को भोपाल के गौहर महल के तर्ज पर म. प्र. आर्कोलॉजी संवार सकता है। इसकी कंपाउंड वॉल की नींव पत्थर की बनी हुई वह आज भी साबुत है। यह स्थल एक बहुत ही सुंदर इको टूरिज्म का पॉइंट बन सकता है।
बुरहानपुर से मोती महल 24 किलोमीटर की दूरी पर है, आसीर ग्राम से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर है और आज भी जब शाम के समय में हमारे सामने से कभी सियार, कभी नेवला, कभी सांप निकल जाता है तो रोंगटे खड़े होते हैं और खुशी भी होती है।
ऐसा माना जाता है कि आसीर की वादियों में अंगूर की खेती भी होती थी।