हमारा शहर..हमारी विरासत : शाही किला-शाही हमाम

बुरहानपुर का शाही किला यानी मुगल पैलेस - इस पैलेस का निर्माण आदिल शाह फारुकी द्वितीय के द्वारा सन 1457 में प्रारंभ किया गया और 1503 में इसका निर्माण पूर्ण हुआ। इसके बाद आने वाले वर्षों में अनेक बादशाहों ने अपने हिसाब से इस में परिवर्तन किए। 

यह पैलेस अपने आप में बहुत ही अनोखा है, चाहे भारत हो चाहे विदेश अापने पैलेस के आजू-बाजू बहुत सारी खुली जगह, बाग बगीचे, प्रांगण देखे होंगे किंतु यह सात मंजिला पैलेस जिसकी की 4 मंजिल जमीन के नीचे है जो तीनों तरफ जमीनों से घिरा हुआ है और आगे का जो हिस्सा है नदी की तरफ का वहीं पर आपको केवल झरोखे देखने को मिलेंगे, ऊपर तीन मंजिले और है। 

इस सात मंजिला पैलेस में दिवाने आम, दिवाने खास, हथिया चढ़ाव, कबूतर की मिनार एवं सबसे अनूठी पहचान इसका हमाम है जिसे हम जनाना हमाम या मुमताज बेगम का हमाम इंग्लिश में बाथरूम किंतु वास्तविकता में यह (बेल्ज शब्द) स्पा पूर्णतया बना हुआ है, इस स्पा में दो हिस्से हैं एक हिस्सा जिसमें एक तरफ से गर्म पानी और एक तरफ से ठंडा पानी आता था बीच के हौज में मुमताज बेगम स्नान किया करती थी व बीच का फव्वारा शॉवर का काम करता था। इस हिस्से में जो पेंटिंग बनी हुई है वह सही मायनों में फ्रेस्को इन टेंपुरा पेटर्न है, इसका अर्थ "रंगों के संयोजन में नक्काशी द्वारा चित्रकारी" है। इतनी सुंदर कलाकारी, अनूठी कलाकारी और यही पूरे ताजमहल का आधार भी है।

आप इस हमाम के दृश्य को भी और उसमें बने मकबरे के दृश्य को भी देख रहे हैं। यदि हम फोटो खींचना प्रारंभ करें तो मैं समझता हूं कि लगभग 1000 के आसपास अलग-अलग फोटोग्राफ खींच पायेंगे, मकबरे की डिज़ाईन, शाहजहां के पगड़ी की डिजाइन, मुमताज बेगम की पगड़ी की डिजाइन, ताजमहल में एंटर होने के बाद में जो गुलदान सफेद संगमरमर के बने हुए हैं वह भी यहां पर कलर में गुलदान देखने को मिलेंगे। 

कब्र पर की गई डिजाइन भी आपको देखने को मिलेगी। ऐसी बहुत सारी चीजें हैं जो इस हमाम की पेंटिंग्स से वहां पर याने ताजमहल में पच्चिकारी जिसमें 32 सेमी प्रिशीयस स्टोन्स के साथ अपनाई गई उन स्टोन्स में एक स्टोन बुरहानपुर क्वॉरी का भी है। इस स्पा के दूसरे हिस्से में संगमरमर का चबूतरा बना हुआ है जिसमें मसाज ट्रीटमेंट, स्मोक ट्रीटमेंट, भिन्न प्रकार के मालिश वगैरा करवाए जाते थे। ऐसा कहते हैं कि इसमें जो तीन और पॉन्ड बने हुए हैं उनमें खस, केवड़ा और गुलाब के इत्र भरे होते थे। 

इतना सुंदर हमाम इस प्रकार की पूरे स्पा की व्यवस्था के साथ सर्वप्रथम 1612 में नूरजहां के लिए बनवाई गई और पश्चात पेंटिंग और दूसरी सारी सुविधाओं का संयोजन मुमताज बेगम के लिए किया गया था।


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