बुरहानपुर में शराब की 44 दुकानों से 155 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो मध्य प्रदेश में एक रिकॉर्ड बन गया। यह आंकड़ा चौंकाने वाला है और यह सोचने पर मजबूर करता है कि अगर इतनी ही गंभीरता और इच्छाशक्ति से नशामुक्ति के प्रयास किए जाते, तो समाज को कितना बड़ा लाभ मिलता!
राजस्व की बात करें तो यह सरकार के लिए एक उपलब्धि हो सकती है, लेकिन एक समाज के रूप में हमें सोचना होगा कि क्या यह सही दिशा है? क्या शराब से प्राप्त यह राजस्व उन बर्बाद हुए परिवारों की पीड़ा से अधिक महत्वपूर्ण है, जो इसकी लत के कारण टूट चुके हैं? कितने ही घरों में रोटी के पैसे शराब में बह जाते हैं, कितने ही बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो जाता है, और कितनी ही महिलाओं को घरेलू हिंसा का शिकार होना पड़ता है।
नशामुक्ति में रिकॉर्ड बनाना ही असली उपलब्धि होगी
शराब बिक्री का रिकॉर्ड बनाने की जगह बुरहानपुर ने नशामुक्ति का रिकॉर्ड बनाया होता, तो यह न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक रूप से भी एक सच्ची सफलता होती। एक स्वस्थ, जागरूक और खुशहाल समाज बनाना ही सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए, न कि शराब की बिक्री से मुनाफा कमाना।
अब समय आ गया है कि हम सभी मिलकर इस दिशा में प्रयास करें और सरकार से यह सवाल पूछें – क्या वे राजस्व के आंकड़े बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं, या समाज को नशे से मुक्त करने के लिए? एक सशक्त, नशामुक्त और उज्ज्वल भविष्य के लिए हमें इस प्रश्न पर गंभीरता से विचार करना होगा।
*डॉ.मनोज अग्रवाल - नशामुक्ति कार्यकर्ता*
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