बुरहानपुर की प्रसिद्ध मिठाई दराबा , क्यों पड़ा यह नाम ? कितना पुराना है इतिहास ? , बालाजी को लगता है प्रसाद का भोग ?

बुरहानपुर/25 सितम्बर, 2024/- मध्यप्रदेश का बुरहानपुर वैसे तो एक ऐतिहासिक शहर है, जो पर्यटन के लिए भी जाना जाता है। लेकिन यहां खाने की कुछ चीजें इतनी मशहूर हैं कि उनकी चर्चा विदेशों तक होती है। 
इन्हीं में से एक है दराबा। इस मिठाई की मांग त्यौहारी सीजन में बहुत अधिक होती है। जितना पुराना यह शहर है, उतनी ही इस मिठाई की आयु भी। 
इस मिठाई की खासियत यह है कि, यह लंबे समय तक ताजी एवं स्वादिष्ट रहती है। इस मिठाई के इतिहास की बात करें तो यह मुगल दरबार के दस्तर खान पर विशेष रूप से परोसा जाता था। तभी से इसका नाम दराबा पड़़ा है, 400 वर्ष पुराने इस शहर के इतिहास के साथ यह मिठाई भी तभी से लोकप्रिय है। दराबा एक ऐसी मिठाई है, जो सिर्फ बुरहानपुर में ही बनती है। विशेष कर इसकी मांग नवरात्रि पर्व में बहुत अधिक होती है, क्योंकि इसे भगवान बालाजी को भोग लगाकर प्रसादी के रूप में बांटा जाता है। बुरहानपुर में दराबा अनेको दुकानों पर उपलब्ध है। इसे तैयार करने के लिए वैसे तो कोई खास सामग्री का उपयोग नहीं होता, इसके लिए रवा, मैदा, शक्कर और घी की जरूरत होती है। सबसे पहले इसका मिश्रण तैयार किया जाता है। इसके बाद कढ़ाई में मिश्रण को डालकर तब तक उबाला जाता है, जब तक यह पूरी तरह से पक कर तैयार ना हो जाये। इसे कढ़ाई से निकालकर हाथों से रगड़ा जाता है। इसके बाद दराबा बनकर तैयार हो जाता है जो शरीर और दिमाग दोनों के लिए फायदेमंद होता है। बाहर से आने वाले लोग भी दराबा खाना नहीं भूलते है। वर्ष भर देशभर से हजारों की संख्या में विदेशी पर्यटक भी यहां आते हैं, जिन्हें दराबा मिठाई काफी भाती है तथा बाजार में इसका मूल्य बहुत अधिक नहीं होकर 500 से 600 रुपये किलो में मिल जाता है।

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