नशा करना एक आत्मघाती कदम है : डॉ मनोज अग्रवाल (संचालक श्री सांई नशामुक्ति केंद्र)

बुरहानपुर - नशा करना एक आत्मघाती कदम है जो न केवल व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि उसके मानसिक स्वास्थ्य और जीवन को भी बर्बाद कर देता है। नशा करने से व्यक्ति की सोच और व्यवहार में परिवर्तन होता है, जिससे वह अपने लक्ष्यों और सपनों से दूर हो जाता है। उक्त बात श्री सांई नशामुक्ति केंद्र बुरहानपुर के संचालक डॉ मनोज अग्रवाल ने बताते हुए कहा कि - नशा करने से व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य पर कई प्रकार के दुष्प्रभाव पड़ते हैं, जैसे कि लीवर की क्षति, दिल की बीमारी, और सांस की समस्याएं। नशा करने से व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, जिससे वह बीमारियों का शिकार हो जाता है।

नशा करने से व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। नशा करने से व्यक्ति को डिप्रेशन, एंग्जाइटी और स्किज़ोफ्रेनिया जैसी बीमारियां हो सकती हैं। नशा करने से व्यक्ति की सोच और व्यवहार में परिवर्तन होता है, जिससे वह अपने परिवार और दोस्तों से दूर हो जाता है।

नशा करने से व्यक्ति के जीवन को भी बर्बाद कर देता है। नशा करने से व्यक्ति की नौकरी चली जाती है, उसके रिश्ते खराब हो जाते हैं और वह अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाता है। नशा करने से व्यक्ति को अपने जीवन का अर्थ और उद्देश्य खोने का खतरा होता है।

इसलिए, नशा करना एक आत्मघाती कदम है जिसे हमें कभी नहीं अपनाना चाहिए। हमें अपने जीवन में अनुशासन और संयम लाना होगा, ताकि हम अपने सपनों को पूरा कर सकें और अपने परिवार और समाज के साथ अच्छे संबंध बना सकें। हमें नशा करने वालों की मदद करनी चाहिए और उन्हें नशा मुक्ति केंद्रों में भेजना चाहिए, ताकि वे अपने जीवन को फिर से पटरी पर ला सकें।

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