दिल में छेद क्यों और कैसे होता है ? जानें इसके शुरुवाती लक्षण , कारण और इलाज ?


दिल में छेद, जिसे जन्मजात हृदय दोष भी कहा जाता है. मेडिकल भाषा में इसे वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट कहा जाता है. यह जन्म के समय मौजूद दिल की एक एब्नार्मेलिटी है. यह दिल के हिस्सों या ब्लड वेसेल्स में छेद या गलत तरीके से जुड़ने के कारण होता है.
इसका समय रहते इलाज न कराने से यह जानलेवा साबित हो सकता है. ऐसे में इसके बारे में जानना बेहद जरूरी है.

दिल में छेद क्यों और कैसे होता है?

दिल में छेद जन्मजात होने वाली समस्या है. यह हृदय के दो निचले कक्षों (वेंट्रिकल्स) के बीच की दीवार में छेद होता है, जिसकी वजह से ब्लड फ्लो गलत दिशा में होने लगता है. इसके कारण दिल पर ज्यादा दबाव पड़ता है और फेफड़ों में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है. कई बार इस बीमारी का पता इन्फेंट स्टेज में ही चल जाता है. वहीं कई बार इसके लक्षण समय रहते पहचान में नहीं आ पाते हैं. ऐसे में इसके शुरुआती लक्षणों के बारे में जानना बेहद जरूरी है.

दिल में छेद होने के लक्षण

तेज सांस लेना
सांस के साथ आवाज आना
थकान होना
कमजोरी महसूस होना
रंग नीला पड़ना
विकास धीरे होना
भूख कम लगना

किशोरावस्था तक के बच्चों में लक्षण

थकान
सांस लेने में तकलीफ
दिल की धड़कन तेज होना
पैरों और टखनों में सूजन
दिल में छेद का इलाज

वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट यानी दिल में छेद का इलाज छेद के साइज और जगह पर डिपेंड करता है. छोटे छेद धीरे-धीरे समय के साथ बंद हो सकते हैं. वहीं बड़े छेदों को सर्जरी या कैथेटर प्रोसेस से बंद किया जाता है.

सावधानियां

गर्भवती होने से पहले और गर्भावस्था के दौरान अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव लाना जरूरी है.
डॉक्टर की सलाह के बाद ही फोलिक एसिड युक्त मल्टीविटामिन ले सकती हैं.
गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान, सिगरेट या शराब का सेवन करने से परहेज करें.
गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर की सलाह से टीकें जरूर लगवाएं।

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे अपनाने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

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