बुरहानपुर - राजस्थान समाज बुरहानपुर द्वारा होली मिलन समारोह के अंतर्गत राजस्थान मूल के सेवाभावी कर्मवीरों ,जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है और अपने सेवा व कार्यों के माध्यम से समाज में प्रतिष्ठित है , उनके लिए राजस्थानी प्रतिभा रत्न सम्मान प्रदान किया गया ।
इस अवसर पर भगवान दास वैष्णव जी का भी सम्मान किया गया उनको जानने वाले उनको प्यार से "भाऊ" के नाम से जानते हैं ।
भगवान दास जी एक स्पष्टवादी,मृदुभाषी व सभी का सहयोग करने वाले नेक दिल इंसान है।
सभी सामाजिक,व्यापारिक व राजनैतिक दलों के मुख्य लोगों से आपकी व्यक्तिगत मित्रता आपके मिलनसार व्यक्तित्व को दर्शाती है।
आईए जानते हैं उनके जीवन की एक झलक
भगवान स्वरूप वैष्णव जी का जन्म राजस्थान की पुण्य भूमि में हुआ , उनकी प्रारंभिक शिक्षा- महाराष्ट्र में हुई ,माध्यमिक शिक्षा-राजस्थान में हुई। पत्नी श्रीमती भगवतीदेवी एक धार्मिक महिला हैं , आपकी संतान- (पांच पुत्रियां/एक पुत्र ) सभी उच्च शिक्षा से शिक्षित हैं।
1--- सर्वप्रथम आप बुरहानपुर मे 1974 मे नौकरी के लिए आए।
2---सन् 1978 से यार्न का कार्य शुरू किया
3--यार्न व्यवसाय से बुरहानपुर के सभी व्यवसाईयो से अच्छा संपर्क बना और भरपूर व्यापारिक सहयोग मिला ।
4--अपने व्यवसाय के साथ साथ सामाजिक गतिविधियों में रूचि बनी । जायन्टस ग्रुप संस्था से जुडाव हुआ।
5--जायन्टस ग्रुप मे फेडरेशन के उपाध्यक्ष तक के पदो पर कार्य किया ।
6--सन् 1987 के 28 जून को यार्न एसोसिएशन की स्थापना हुई। कई वर्षों तक एसोसिएशन का अध्यक्ष रहते हुये नगर मे मेडीकल कैम्प, आई कैम्प ,कैंसर कैम्प जैसे समाज सेवा के कार्य किये।
7- कुछ जायन्टस मित्रों ने जायन्टस चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना कर शहर मे मूक बधिर अंध विद्यालय की शुरूआत की । जिसमे अध्यक्ष एवं ट्रस्टी रहते हुए शाला का सफल संचालन किया।
8--समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व को निभाते हुए समाज की विभिन्न संस्थाओं राजस्थानी समाज, टेक्सटाइल एसोसिएशन,पावरलूम संरक्षण समिति, इन्द्र नगर सोसायटी,
फेयरडील सोसायटी जैसी संस्थाओ मे अपनी सेवाएं प्रदान की।
9--नगर मे धार्मिक आयोजनों मे सक्रियता से भाग लेकर यज्ञ एवं कथा आयोजनो को सफल बनाने में सहयोग प्रदान किया।
10-- रामझरोखा मंदिर,भक्तिधाम
मंदिर,अन्नपूर्णा मंदिर के ट्रस्ट मे ट्रस्टी रहते हुए उनकी स्थापना एवं संचालन मे सहयोगी बने।
11---अगस्त सन् 2020 मे कोरोना के चलते पारिवारिक कारणों से बुरहानपुर छोडकर राजस्थान निवास के लिए जाना पडा।
किन्तु आज भी बुरहानपुर के प्रति पूरा लगाव है और प्रति वर्ष किसी ना किसी कार्यो के कारण बुरहानपुर से जीवन्त सम्पर्क है।
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