दतिया। महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय उज्जैन (संस्कृतशिक्षणप्रशिक्षणज्ञानविज्ञानसंवर्द्धनकेन्द्रम्)
एवं भारतीयभाषासमिति, नवदेलही के संयुक्त तत्त्वावधान में “सरलमानकसंस्कृतम्” विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीयकार्यशाला श्री पीताम्बरा पीठ संस्कृत महाविद्यालय, दतिया में आयोजित की गयी।
कार्यशाला में चार सत्र आयोजित किये गये। प्रथम सत्र उद्घाटन सत्र का था – जिसके मुख्यातिथि प्रो. आर. पी. गुप्ता पूर्व संस्कृतविभागाध्यक्ष शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, दतिया, मुख्यवक्ता डा. उपेन्द्र भार्गव, सहायक प्राध्यापक, महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय उज्जैन, विशिष्टातिथि श्याम पटैरिया, सदस्य संस्कृत महाविद्यालय विकास समिति थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डा. हरेन्द्र कुमार भार्गव ने की। अतिथियों का स्वागत विश्वविद्यालय से आये हुये कार्यशाला के संसाधक डा. दिनेश चौबे ने माल्यार्पण एवं अंगवस्त्र से किया। मुख्याथिति प्रो. आर. पी. गुप्ता ने कहा कि यह कार्यशाला हम सब के लिये बहुत ही उपयोगी है। हम सब मिलकर शास्त्रों का संरक्षण करें। संस्कृत मय वातावरण का निर्माण करें। अपने बच्चों को संस्कृत सिखायें। तभी भारतीय संस्कृति एवं संस्कृत जीवित रहेगी।
डा. उपेन्द्र भार्गव ने सरलमानकसंस्कृत पर विशेष चर्चा करते हुये कहा कि हमारे सम्पूर्ण शास्त्रों की संरचना संस्कृतभाषा में ही की गयी है। जब हम संस्कृत के छोटे-छोटे वाक्यों को जानेंगे। तत्पश्चात् विशेष वाक्यों को जानने की जिज्ञासा उपत्पन्न होगी। विशेष वाक्यों के ज्ञान के पश्चात् हम भारतीय संस्कृति, भारतीय ज्ञान को भी जान सकते हैं। हमारे शास्त्र संस्कृतभाषा में ही रचित हैं। सरल शब्दों का प्रयोग करें, पर्याय वाची शब्दों को प्रयोग करें, तो इस भाषा में रचित शास्त्र सबके लिये ग्राह्य होंगे। उन्होंने विभिन्न प्रकार के उदाहरण देकर प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षित किया।
श्याम पटैरिया ने कहा कि यह भाषा बहुर ही सरल है। इसे हम सभी सीखें। अध्यक्षीय उद्बोधन में डा. हरेन्द्र भार्गव ने कहा कि सरलमानकसंस्कृत समाज के लिए बहुत उपयोगी होगी एवं आगामी युग संस्कृत का ही होगा। पहले की अपेक्षा विश्व में संस्कृत के ऊपर बहुत शोधकार्य किया जा रहा है। हमारे शास्त्रों का अध्ययन एवं अध्यापन सरल् संस्कृत में हो। पाणिनि द्वारा निर्मित नियमानुसार ही शब्दों के प्रयोग में हो।
द्वितीय सत्र के मुख्य वक्ता डा. हरेन्द्र भार्गव ने प्रतिभागियों को प्रोद्योगिकी के माध्यम से विभिन्न स्थानों पर संस्कृत में हो रहे कार्यों के बारे में जानकारी दी।
तृतीय सत्र के मुख्य वक्ता डा. लवलेश मिश्र ने संस्कृत में प्रयोग किये जाने वाले सरल शब्दों के प्रयोग के बारे में प्रतिभागियों को बताया।
चतुर्थ सत्र सामूहिक चर्चा का था। जिसमें विश्वविद्यालय से आये हुये डा. राजेश मण्डल एवं डा. दिनेश चौबे ने सभी प्रतिभागियों के साथ सरलमानकसंस्कृत के बारे में विभिन्न प्रकार की चर्चा की।
कार्याशाला में डा. प्रवीण दुबे, डा. आशा पाठक, डा. रमा आर्य, मदन मोहन शर्मा, एम के सक्सेना, अशोक श्रीवास्तव, रामजी राय, कुंजविहारी गोस्वामी, राजेश त्रिपाठी, गजानन तिवारी, ब्रजेश शुक्ल, अरुण मिश्र, संजीव शुक्ला, अखिलेश खरे, आरती, सोनिया, पुनीत, अनिल इत्यादि सौ से अधिक प्रतिभागियों के भाग लिया।
कार्यक्रम का प्रारम्भ वैदिक मंगलाचरण कर मां पीताम्बार माई एवं महाराज को माल्यार्पण कर के हुआ। कार्यक्रम का संचालन डा. लवलेश मिश्र ने किया। अन्त में महाविद्यालय की प्राध्यापिका डा. सुजाता शाण्डिल्य ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
Tags
दतिया समाचार