बुरहानपुर। 17वीं शताब्दी में भारत की भूमि पर अनेक महापुरूषों और वीरों ने जन्म लिया। जिसके फलस्वरूप आज मां भारती और हम भारतवासी होकर भारत भूमि पर अपनी सांस ले पा रहे है। इस काल में गुरू गोविंदसिंह जी, छत्रपति शिवाजी महाराज आदि ने जन्म लेकर अत्याचार और अनाचार के विरूद्ध संघर्ष करते हुए भारतीयता की रक्षा की। ऐसे महापुरूषों की यादें आने वाली पीढ़ी और संपूर्ण विश्व जान सके, इस दृष्टिकोण से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गुरू गोविंदसिंह के 350वीं जयंती पर अपने बुरहानपुर के लिए 17 करोड़ की लागत से श्री गुरूगोविंदसिंह मेमोरियल म्यूजियम की स्वीकृति प्रदान कराकर हम यह ‘‘खांडा‘‘ आकार में तीन मंजिला भवन निर्माण करा रहे है। जो मई 2024 के पूर्व माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी वर्चुअल या एक्चूअल आकर लोकार्पित करेंगे।
मंगलवार को बुरहानपुर में बन रहे श्री गुरूगोविंदसिंह मेमोरियल संग्रहालय का पूर्व मंत्री एवं भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) के साथ बुरहानपुर के समस्त जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों एवं समाज के प्रबुद्धजनों ने अवलोकन किया।
भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज लधवे ने कहा कि मध्यप्रदेश में भोपाल के बाद बुरहानपुर एक ऐसा नगर है जहां सर्वाधिक पुरातत्व सम्पदाएं देखने को मिलती है। जिनमें असीरगढ़, कुंडी भंडारा आदि दर्जनों स्थान और धरोहर ऐसी है जो अपने बुरहानपुर का नाम देश-विदेश तक पहुंचा सकती है। जिनको अर्चना दीदी ने अपने मंत्रीत्व काल में प्रयासरत रहते हुए जो किया उसके फलस्वरूप आज यह विशाल संग्रहालय निर्माणाधीन होते दिख रहा है।
वरिष्ठ अधिवक्ता अरूण शेंडे ने कहा कि मेरी बेटी अर्चना चिटनिस की सजगता और दक्ष कार्यशैली के फलस्वरूप ही बुरहानपुर को अनेक सौगातें मिलती रही है। बुरहानपुर को विश्व पर्यटन के नक्शे पर लाने हेतु यूनेस्को अंतर्गत कुंडी भंडारा को शामिल कराने के लिए अर्चना दीदी ने 2013 में शिक्षा मंत्री रहते हुए लालबाग-पातोंडा से कुंडी भंडारा रेल्वे ओवर ब्रिज का निर्माण कराने की स्वीकृति दिलाकर कार्य प्रारंभ किया था। जो विगत पांच वर्षों में उनके विधायक न होने के कारण पूरा नहीं हो सका।
रूपिन्दरसिंह कीर ने कहा कि भारत सरकार द्वारा इस योजनांतर्गत जो 100 करोड़ रूपए स्वीकृत किए गए उनमें से 17 करोड़ रूपए बुरहानपुर जैसे छोटे नगर को दिलवाना यह केवल अर्चना दीदी जैसा कुशल और सक्षम नेतृत्व ही करिश्मा करा सकता है। श्री गुरूगोविंदसिंह मेमोरियल म्यूजियम निर्माण की पहल हेतु सिख समाज की ओर से हम सब आपके आभारी है।
*भवन की संरचना*
पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस ने बताया कि म्यूजियम बिल्ंिडग ग्राउंड फ्लोर के अलावा दो फर्स्ट फ्लोर और सेकेंड फ्लोर होंगे। जिसका टोटल एरिया स्क्वायर मीटर 6279 स्क्वायर मीटर होगा। भवन के निर्माण की कुल कीमत 17 करोड़ 6 लाख होगी। भवन की डिजाइन सिख पंथ के पवित्र चिन्ह ‘‘खांडा‘‘ जैसी होगी। जिसमें 500 सीटर ऑडिटोरियम का निर्माण किया जाएगा। पार्किग और पार्क के साथ पाथ वे की भी सुविधा होगी। भवन में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की भी व्यवस्था की जाएगी। श्री गुरूगोविंदसिंह मेमोरियल संग्रहालय में 10वें गुरू श्री गुरूगोविंदसिंह की जीवनी को दर्शाया जाएगा। श्रीमती चिटनिस ने बताया कि गुरूगोविंदसिंह जी ने स्वयं अनेक ग्रंथों की रचना की, उनके दरबार में 52 कवि तथा लेखकों की मौजूदगी रहती थी, इसलिए उन्हें “संत सिपाही” भी कहा जाता है। श्री गुरूगोविंद सिंह जी शांति, क्षमा, सहनशीलता परिपूर्ण थे। उनमें समता, समानता और समरसता का भरपूर ज्ञान था वे लोग रंग भेदभाव आदि में विश्वास नहीं करते थे।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मा. नरेन्द्र मोदी जी की घोषणा के बाद से ही पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस बुरहानपुर में श्री गुरूगोविंदसिंह जी की 350वीं वर्षगांठ को समारोह स्वरूप में मनाए जाने तथा बुरहानपुर में दशमेश श्री गुरूगोविंदसिंह जी के मेमोरियल म्यूजियम की स्थापना हेतु निरंतर प्रयासरत रही है। वे इस दिशा में भारत सरकार के संस्कृृति एवं पर्यटन मंत्रालय तथा गुरूगोविंदसिंह जी की 350वीं वर्षगांठ के लिए गठित समिति के अध्यक्ष केन्द्रीय गृह मंत्री मा.राजनाथसिंह तथा सदस्य सुश्री सुषमा स्वराज जी, डॉ. महेश शर्मा जी, डॉ. एस.एस. अहलुवालिया से निरंतर पत्राचार तथा व्यक्तिगत संपर्क में रहकर प्रयासरत रही थी।
*6 माह 9 दिन बुरहानपुर रूके थे गुरू गोविंदसिंह*
पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) ने कहा कि ऐसी ऐतिहासिक घटनाओं के स्मरणोत्सव से ही भविष्य की पीढि़यां जड़ों से जुड़ सकेंगी। जो इतिहास भूल जाते है वह कभी इतिहास नहीं बना सकते। सिख सम्प्रदाय के दशम गुरू गोविंदसिंह जी का जून, 1708 ईसवी में नांदेड जाते समय छः माह नौ दिन तक बुरहानपुर में निवास रहा है। इसी ठहराव के समय में उन्होंने सुनहरी बीड (गुरूग्रंथ साहब) को लिपिबद्ध करवाया था। इस बीड़ के सभी पन्नों को सुनहरे बेलबूटों की कलापूर्ण चित्रकारी से सुसज्जित किया गया है। अंतिम पन्ने पर श्री गुरूगोविंदसिंह जी के करकमलों से उन्होंने स्वयं इस बीड़ पर सुनहरी स्याही से ओंमकार लिखकर इस महान ग्रंथ और गुरूद्वारे को पवित्रता-आस्था प्रदान की। बताया जाता है कि संपूर्ण विश्व में इस विशिष्टता के एकमात्र बीड़ (गुरूग्रंथ साहब) है। बुरहानपुर गुरूद्वारा बड़ी संगत के पीछे श्री गुरूगोविंदसिंह जी का पूजा स्थल है जहां गुरूजी स्वयं साधना-आराधना करते थे एवं पास ही एक कुआं भी स्थित है, जो तत्कालीन समय का है।
इस अवसर पर मनमोहनसिंह बिंद्रा, माधवबिहारी अग्रवाल, ओमी शर्मा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष गजानन महाजन, रामभाउ सोनवणे, जगदीश कपूर, मनोज माने, सिंधी समाज अध्यक्ष बलराज नावानी, गुरू दयालसिंह, माली समाज अध्यक्ष प्रभाकर चौधरी, किशोर पाटिल, वीरेन्द्र तिवारी, प्रदीप पाटिल, किशोर पाटिल खामनी, श्रीमती कविता अरूण सूर्यवंशी, मुकेश शाह, कैलाश पारीख, चिंतामन महाजन, ईश्वर चौहान, अजयसिंह कीर, संभाजीराव सगरे, राजू शिवहरे, धनराज महाजन, आशीष शुक्ला, गौरव शुक्ला, रितेश सरोदे, किशोर राठौर, रूद्ररेश्वर एंडोले, किशोर कामठे, रवि गुप्ता, अजहर-उल-हक, मनोज चौधरी, विनोद कोली, मनोहर चौधरी, देवानंद पाटिल, फिरोज तड़वी, राजेन्द्र यादव, देवीदास महाजन, दिवाकर सपकाले, रूपेश लिहनकर, पांडुरंग जाधव, विक्रम चंदेल, नितीन महाजन, दीपक महाजन, किशोर सोनी, किरण रायकवार, उमा कपूर, सुवर्णा पाटिल, रेखा सोनी, सविता मेहरा, नीमा पिलिया, गोपाल चौधरी, रवि काकड़े, उमाकांत चौधरी, रूपसिंह, रवि सहगल, सुधीर सहगल, डॉ.मनोज अग्रवाल, वैभव महाजन, दिनकर महाजन, विजय उमाले, साहेबराव शंखपाल, महेन्द्र चौधरी, उमेश देवस्कर, अरूण चौधरी, शेख ताजू, हेमराज पाटिल, मिश्रीलाल चौहान, वामन माली, रामभाउ दबंगे, आदिनाथ सपकाले, आकाश चौधरी एवं आकाश रांखुडे, आरकेटेक समीर दीक्षित, इप्को के आरकेटेक सतीश जी, पर्यटन विभाग एसडीओ दीपक राज, सब इंजीनियर निलेश सेंगले सहित अन्य जनप्रतिनिधि व गणमान्य नागरिकगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन मनोज माने ने किया।
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