फेफड़ों के कैंसर के लक्षण
छाती में दर्द: फेफड़ों के कैंसर के प्रारंभिक चरण में छाती में दर्द और बेचैनी हो सकती है. यह दर्द सामान्यतः अनुकूल नहीं होता है और लम्बे समय तक बना रहता है.
सांस में कष्ट: फेफड़ों के कैंसर के विकास के साथ सांस में कष्ट हो सकता है. सांस लेने में तकलीफ हो सकती है.
खूनी खांसी: फेफड़ों के कैंसर के मरीजों में खूनी खांसी की समस्या देखने को मिलती है. खांसी के साथ खून आने का लक्षण हो सकता है.
सांस में रुकावट: कैंसर के विकास के कारण फेफड़ों की नलियों में रुकावट हो सकती है, जिससे सांस लेने में तकलीफ हो सकती है.
भरी हुई छाती: कैंसर के विकास के साथ छाती में भारीपन या बुढ़ापे जैसा अहसास हो सकता है.
वजन कम: फेफड़ों के कैंसर के मरीजों में बिना वजह वजन कम होने की समस्या हो सकती है.
थकान और कमजोरी: कैंसर के प्रारंभिक चरण में थकान और कमजोरी की समस्या हो सकती है.
इन गलतियों से फेफड़ों के कैंसर का खतरा कई हद तक बढ़ जाता है.
धूम्रपान
तंबाकू और धूम्रपान फेफड़ों के कैंसर का प्रमुख कारण है. सिगरेट, बिड़ी, हुक्का और तम्बाकू के उपयोग से श्वसन नली में बदलाव होता है, जो कैंसर के विकास को प्रोत्साहित करता है.
प्रदूषण
वायु में मौजूद धूल, कचरा, कार धुआं और जहरीले गैसें फेफड़ों को खराब करती हैं और कैंसर के जोखिम को बढ़ाती हैं. यह विशेष रूप से शहरों में रहने वाले लोगों के लिए खतरनाक होता है.
अनहेल्दी खानपान
अनहेल्दी डाइट जैसे ऑयली-मसालेदार खाना, फास्ट फूड, बेकरी उत्पादों और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन करने से भी फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ता है. हेल्दी और शाकाहारी डाइट अपनाने से कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है.
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