क्या है विश्व स्तनपान सप्ताह का इतिहास ? जानते हैं इसके रोचक तथ्य

विश्व स्तनपान सप्ताह का इतिहास

साल 1991 में स्तनपान को समर्थन और बढ़ावा देने के लिए वर्ल्ड अलायंस फॉर ब्रेस्ट फीडिंग एक्शन (WABA) का गठन किया गया था. प्रारंभ में साल में एक दिन स्तनपान दिवस मनाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन यह मुद्दा चूंकि आम जनजीवन और बच्चों की सेहत जैसे मुद्दे से जुड़ा था, इसलिए इसकी उपयोगिता और जरूरत को देखते हुए इसे एक सप्ताह देते हुए इसे विश्व स्तनपान सप्ताह (World Breast feeding Week) नाम दिया गया. 1992 में पहली बार विश्व स्तनपान सप्ताह का आयोजन किया गया. इसका मुख्य उद्देश्य था स्तनपान प्रवृत्ति को बढ़ावा देना और दुनिया भर के बच्चों की सेहत को बेहतर बनाना. आज सौ से अधिक देश इस साप्ताहिक आयोजन से जुड़े हैं.

स्तनपान के कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

यह बच्चे की नींद के पैटर्न को प्रभावित करता है.

माँ का दूध बच्चों को सोने के लिए प्रेरित करता है.

माँ के दूध में हार्मोन होते हैं.

माँ के दूध में प्रोलैक्टिन और ऑक्सीटोसिन होता है.

माँ के दूध से कई बीमारियों का जोखिम कम होता है.

मान्यता है कि स्तनपान कराने वाली महिलाओं को स्तन कैंसर की संभावना कम होती है.

शिशु मृत्यु सिंड्रोम का खतरा कम होता है.

विश्व स्तनपान सप्ताह क्यों महत्वपूर्ण है?

यह सप्ताह स्तनपान को बढ़ावा देता है, और दुनिया भर में महिलाओं को एक निश्चित अवधि तक अपने बच्चों को स्तनपान कराने के लिए प्रोत्साहित करता है. नई मांओं को स्तनपान के महत्व का पता चलता है.

इस सप्ताह का उद्देश्य यह पहचानना है कि नवजात शिशुओं के साथ-साथ उनकी माताओं के लिए स्तनपान क्यों आवश्यक है. विश्व स्तनपान के दौरान स्तनपान से जुड़े कई ज्ञानवर्धक तथ्य सामने आते हैं, जिनमें पता चलता है कि स्तनपान कराने वाली माताओं को दूध बढ़ाने के लिए किस तरह का आहार लेना चाहिए, और बच्चों को कब-कब दूध पिलाना चाहिए.

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