माताओं के लिए स्तनपान कराने के फायदे
वजन करता है कम
हेल्थलाइन के मुताबिक, प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं का वजन काफी बढ़ जाता है. ऐसे में जब मांएं नियमित रूप से बच्चे को फीड कराती हैं तो वे तेजी से कैलोरी बर्न करती हैं जिससे धीरे धीरे 3 महीने में अंदर वे अपने नॉर्मल फीगर पा लेती हैं.
हेल्दी रखता है यूट्रस को
जब महिलाएं बच्चों को ब्रेस्टफीड कराती हैं तो उनके शरीर में ऑक्सीटॉसिन हार्मोन रिलीज होता है. यह प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के दौरान बढ़े यूट्रस को अपने पुराने आकार में लौटने में मदद करता है.
डिप्रेशन करता है कम
बच्चे के जन्म के बाद मांओं में पीपीडी यानी कि पोस्टपार्टम डिप्रेशन की समस्या शुरू हो जाती है. लेकिन शोधों में पाया गया है कि जो मांएं ब्रेस्टफीड कराती हैं उनमें डिप्रेशन की शिकायत कम देखने को मिलती है.
ब्लड प्रेशर की समस्या से बचाव
शोधों में ये पाया गया है कि जो मांएं अपने बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती रही हैं उनमें आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत कम देखने को मिलती है.
कैंसर से बचाव
पाया गया है कि जो महिलाएं अपने बच्चे को जन्म से कम से कम 6 महीने या उससे अधिक समय तक ब्रेस्टफीड कराती हैं उनमें ओवरियन कैंसर का खतरा काफी कम हो सकता है.
डायबिटीज से बचाव
यही नहीं, शोधों में देखा गया है कि जो महिलाएं अपने बच्चे को लंबे समय तक स्तनपान कराती रही हैं उन्हें जीवन में डायबिटीज टाइप टू होने का खतरा काफी कम हो जाता है.
दिल को रखता है हेल्दी
ब्रेस्टफीड कराने वाली महिलाओं को हार्ट से जुड़ी बीमारियां भी काफी कम हो सकती हैं. उनमें हार्ट अटैक, हार्ट फेल आदि होने की संभावना काफी कम रहती है।
प्रग्नेंसी से प्रोटेक्शन
कई महिलाओं में यह पाया गया है कि ब्रेस्टफीड कराते रहने के दौरान उन्हें पीरियड नहीं होता और इस वजह से दूसरी प्रेग्नेंसी का खतरा कम हो जाता है. हालांकि यह सभी न्यू मॉम्स के साथ नहीं होता.
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