फैटी लिवर की बीमारी, लिवर में अतिरिक्त वसा के जमा होने के कारण होती है।
यह दो तरह का हो सकता है- फैटी लिवर डीजीज और नॉन अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी)। शराब का सेवन न करने वालों को भी फैटी लिवर की दिक्कत हो सकती है।
फैटी लिवर की समस्या वाले ज्यादातर लोगों में अक्सर तब तक कोई लक्षण नहीं दिखते जब तक कि रोग, लिवर में काफी बढ़ नहीं जाता है। इस स्थिति में कई प्रकार की दिक्कतें हो सकती हैं।
• पेट में दर्द या पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में भारीपन महसूस होना।
• मतली, भूख न लगना या वजन कम होना।
• पीली त्वचा (पीलिया)।
• पेट में सूजन और पैर में सूजन (एडिमा)।
अत्यधिक थकान या कमजोरी होना।
डॉक्टर की सलाह पर फुल बॉडी चेकअप में लिवर की जांच कराते रहना आपको भविष्य में इससे संबंधित बीमारियों से बचाने में सहायक हो सकता है। ये टेस्ट लिवर की समस्याओं का पता लगाने में मदद करते हैं।
सीरम बिलीरुबिन टेस्ट: यह परीक्षण रक्त में बिलीरुबिन के स्तर को मापता है।
सीरम एल्बुमिन टेस्ट: इस टेस्ट का उपयोग एल्ब्यूमिन (रक्त में एक प्रकार के प्रोटीन) के स्तर को मापने के लिए किया जाता है और लिवर रोगों के निदान में सहायक है।
लिवर फंक्शन टेस्ट: इसके माध्यम से जाना जा सकता है कि लिवर ठीक से काम कर रहा है या नहीं।
लिवर को स्वस्थ रखने के उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कुछ सामान्य सी बातों का ध्यान रखकर लिवर की बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।
• शराब के सेवन से बचें। इसका कम मात्रा में सेवन भी लिवर सिरोसिस या लिवर कैंसर का कारण बन सकता है।
• फल-सब्जियां खान से पहले अच्छे से धोएं जिससे उसके विषाक्त पदार्थों को हटाया जा सके।
• हेपेटाइटिस ए, बी और सी से बचाव करें।
• नियमित व्यायाम करें और स्वस्थ आहार का सेवन करें।
• वजन कम रखें, यदि आप डायबिटिक हैं तो इसे कंट्रोल करें।
डिस्क्लेमर: प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे अपनाने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।
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