माँ अंबे की घटस्थापन के आखिरी दिन हुआ विशाल भंडारा, देर रात चला गरबा रास

बुरहानपुर - शारदीय नवराात्रि में माँ अंबे की घरों में घटस्थापन की जाती हैं जिसकी 22 दिन तक अखंड ज्योत व विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती हैं। मंडी बाज़ार स्थित सोमवंशी आर्य क्षत्रिय लोहार समाज के क्षितिज शंखपाल द्वारा भी माँ अंबे की घर में घटस्थापन की गई उन्होंने बताया कि जिन लोगों की मन्नत पूरी होती हैं उनके द्वारा या कई लोग अपनी अपनी इच्छानुसार भी घरों में माँ अंबे की घटस्थापन करते हैं जिसकी अधिकतम 22 दिनों तक कडे नियमों का पालन कर पूजा- अर्चना व आराधना और साधना की जाती है इन दिनों लगातार हवन, पूजन के साथ हर रोज पारंपरिक वैशभूषा में गरबे खेले जाते हैं, क्षितिज ने बताया कि आखिरी दिन पूरी रात गरबा रास कर माँ अंबे की आराधना की गई जिसके बाद माँ अंबे की विदाई कर घटस्थापन को ताप्ती घाट पर विसर्जन किया गया, और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है, जिसमें लगभग 2 हजार समाज एवं गैर समाज के लोगो ने प्रसादी ग्रहण की। इस दौरान सोमवंशी आर्य क्षत्रिय लोहार समाज के अध्यक्ष अनिल नवग्रहे, रवीन्द्र शंखपाल, मनोज शंखपाल, विनोद शंखपाल, वीरू शंखपाल, हरीश मोरे, गजानन नवग्रहे, मयूर शंखपाल, नवल शंखपाल, धवल शंखपाल सहित अन्य लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

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