शकुनि के पासे का रहस्य
शकुनि हस्तिनापुर के महाराजा धृतराष्ट्रा की पत्नी का भाई था. शकुनि (Mama Shakuni) की जीत का राज़ उसके पासों में छिपा था. शकुनि 'चौसर ' में जिन पासों का इस्तेमाल करता था वो कोई आम पासे नहीं थे. कहते हैं कि ये पासे शकुनि के मृत पिता की हड्डियों से बने थे. यही वजह है कि वो अपनी हर चाल में सफल हो पाता था. कहा जाता है कि शकुनि के पिता की आत्मा इन पासों में रहती थी.
चौसर की हर चाल कैसे जीतता था शकुनि
- मान्यता है कि शकुनि के पासे में उसके पिता की आत्मा का वास था, जिसकी वजह से पासे शकुनि के इशारे पर काम करते थे. धर्म ग्रंथों के अनुसार शकुनि की चौसर में रूचि को देखते हुए पिता ने कहा कि मृत्यु के बाद मेरी उंगलियों से पासा बनवा लेना. ये हमेशा तुम्हारी आज्ञा का पालन करें और जुए के खेल में सिर्फ तुम्हारी जीत होगी.
- शकुनी ने अपने परिवार के साथ हुए अन्याय का बदला लेने के लिए कौरव और पांडवों के सामने चौसर खेलने का षडयंत्र रचा था. वो अच्छी तरह जानता था कि जुए में उसकी जीत पक्की है. छल, कपट से युक्त शकुनि ने पांडवों के विनाश के लिए कई चाल चलीं. शकुनि के पासे की वजह से कौरव बाजी जीत कर भी हार गए, क्योंकि पांडवों के साथ शकुनि कौरवों का विनाश भी चाहता था और महाभारत के युद्ध में कुरु वंश का विनाश हो गया.
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