दही हांडी उत्सव क्या है व इसे क्यों मनाया जाता है ?

दही हांडी पर्व का संबंध कान्हा की लीलाओं से है. द्वापर युग से ही दही हांडी का उत्सव मनाने की परंपरा चली आ रही है. आइए जानते हैं -

क्या है दही हांडी उत्सव ?

  • दही हांडी उत्सव वैसे तो पूरे देशभर में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है लेकिन महाराष्ट्र और गुजरात में ये पर्व बहुत प्रसिद्ध है. इसमें एक मिट्‌टी की हांडी में दही, माखन, भरकर रस्सी के सहारे कई फीट की ऊंचाई पर लटका देते हैं.
  • इस खेल में भाग लेने वाले युवाओं, बच्चों को गोविंदा कहते हैं. ये गोविंदा एक पिरामिड बनाकर मटकी को फोड़ते हैं. मटकी फोड़ने वाली विजेता टीम को पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है.
  • इस दौरान कृष्ण के भजन, लोकगीतों से वातावरण कृष्ण की भक्ति में डूब जाता है. दही हांडी उत्सव के रूप में कान्हा की आराधना की जाती है.

क्यो मनाते हैं दही हांडी पर्व ?

  • दही हांडी पर्व को मनाने का उद्देश्य कान्हा की बाल लीलाओं को दर्शाना है. बाल गोपाल को माखन और दही बहुत प्रिय था.
  • नटखटा कान्हा अक्सर अपने सखाओं के साथ गोपियों के घर से माखन चुराया करते थे. लड्‌डू गोपाल की शरारत से तंग आकर गोपियां माखन, दही और घी को रस्सी से ऊंचाई पर टांग दिया करती थी लेकिन कान्हा की चतुराई के आगे सबकी योजना फेल हो जाती थी.
  • कृष्ण जी अपनी टोली संग पिरामिड बनाकर माखन चुरा लिया करते थे. तभी से दही हांडी की परंपरा निभाई जाती है. मान्यता है कि दही हांडी का उत्सव मनाने से घर में सुख-समृद्धि आती है. साथ ही कृष्ण की विशेष कृपा से आसपास का वातावरण भी खुशहाल हो जाता है.

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