बुद्ध पूर्णिमा विशेष -ग्राम लोनी के लोगों ने बिना शास.अनुदान स्वंय के सहयोग से बुद्ध स्मारक एवं उपवन बनाने का लिया प्रण , देश के 50 तीर्थ स्थलों की मिट्टी व पवित्र नदियों के जल को मिलाया जायेगा

बुरहानपुर - विश्व को शांति, करूणा एवं मैत्री का शाश्वत संदेश देने वाले विश्वदीप महाकारूणिक तथागत भगवान गौतम बुद्ध के सुत्र वाक्य ’’ अत्त दीप भवः’’ अर्थात् अंधेरे के विरूद्ध स्वंय दीप बनो से प्रेरणा लेकर ग्राम लोनी के नागरिको ने बगैर किसी शासकीय अनुदान अथवा निधि के स्वंय ही जनभागीदारी में बुद्ध स्मारक एवं उपवन बनाने का प्रण लिया। 
इस हेतु ग्राम के वार्ड क्रं. 08 में स्थानीय कार्यकर्ता संदीप ठाकरे और उनकी टीम द्वारा एक अस्थाई अतिक्रमण हटाकर 2000 वर्ग फीट का भू-खंड चिन्हित किया गया। 
’’पे बैक टू सोसायटी’’ के तर्ज पर संदीप ने अपने कुछ मित्रों विशेष रूप से कर्म-जन्म भूमी सेवा समिति, नेपानगर के श्री ह्दयेश उपाध्याय, को इस पुनित कार्य के निर्माण में सहायता हेतु आव्हान किया। 
प्रतिसाद में भारत भर में फैले हुए उनके मित्र मंडल की और से शुभकामना संदेशो से ऊर्जा का नवसंचार हुआ और देखते ही देखते जिनसे जो बन पड़ा उस मदद के साथ इस ऐतिहासिक और प्रेरणास्पद कार्य को गतिमान किया। 
गौर तलब है कि इस स्मारक के निर्माण साईट पर स्थानीय नागरिक, युवा, बच्चे, महिलाएॅ सभी अपने-अपने स्तर पर योगदान कर रहे है। दिन में नौकरी पेशा, खेती-किसानी और मजदुरी करने वाले युवा रात में अपना आराम और नीद त्यागकर देर रात 2 बजे तक यहाॅ पर श्रम दान करते है। 
1 माह से भी अधिक नीव भराई, प्रतिमा का मंच एवं चारो ओर की बाउन्ड्री में अभी तक मजदुरी के नाम पर 1 रूपया भी खर्च किये बगैर समाज की एकजुटता के आधार पर केवल श्रमदान के कारण स्मारक आकार ले रहा है। 
यही नही जहाॅ-जहाॅ भगवान बुद्ध के जीवन काल में उनके चरण कमल पडे़ थे ऐसे लुम्बिनी, सारनाथ, बनारस, बुद्धगया, कुशीनगर सहित भारत के 50 तीर्थ स्थलों की मिटट्ी, साथ ही गंगा, जमुना, ब्रम्हपुत्र, सरयु, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, नर्मदा, क्षिप्रा, ताप्ती और भारत की अन्य प्रमुख पवित्र नदीयों का जल भी संदीप ठाकरे ने उनके सहयोगियों के माध्यम से इस पवित्र संकल्प के साथ संग्रहित किया है कि यह समस्त पवित्र सामग्री इस स्मारक में विधिवत स्थापित करेगें और इस स्मारक को वंदन करते ही समस्त तीर्थो को वंदन हो जायेगा। 
आज के इस युग में जहाॅ पर लोग अपने लिये समय नही निकाल पाते ग्रामवासियों द्वारा आने वाली पीढ़ियों को विकारमुक्त करने के पवित्र संकल्प के साथ निर्माणाधीन यह बुद्ध विहार शीघ्र बनकर तैयार होकर समाज की एकता अखंडता सौहार्द्र और मैत्री को और प्रगाढ़ करता रहे बुद्ध जंयती पर यही अशेष मंगलकामनाऐं।

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