दो दिवसीय कार्यशाला में भारतीय अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान लुधियाना से आए वैज्ञानिक डॉ.संदीप दबंगे द्वारा बीज वाली मसाला फसलें धनिया, जीरा, मिर्च एवं भूमिगत राइजोम जैसे अदरक हल्दी आदि फसलों को उनकी कटाई एवं खुदाई के समय रखी जाने वाली प्रमुख सावधानियां जैसे पकने का सही समय, फसलों के कटाई का सही समय, फसल में नमी की मात्रा कितनी रखी जानी चाहिए इसके बारे में बताया साथ ही किसानों को उनके संस्थान द्वारा किस प्रकार से बीज वाली मसाला फसलें एवं राइजोम फसलों में पिसाई के समय उनके तापमान को नियंत्रित करके उनमें उपस्थित तेल की मात्रा जो इन उत्पादों की मुख्य गुणवत्ता होती है, उसे किस प्रकार से संरक्षित किया जाए और उत्पादों की पैकिंग के समय रखी जाने वाली सावधानियां जैसे ढीली पैकिंग ना हो के बारे में जानकारी दी साथ ही उनके संस्थान द्वारा किसानों को मसाला फसलों के लिए आवश्यक कृषि उपकरणों के बारे में जानकारी दी गई और इन उपकरणों पर सरकार द्वारा दी जाने वाली विभिन्न सब्सिडी के बारे में जानकारी दी गई।
राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के सहायक अनुसंधान निदेशक डॉ. इंदर सिंह नरूका द्वारा विभिन्न बीजीय मसाला फसलों में पाए जाने वाले तेल की मात्रा एवं बीजीय मसाला फसलों की बुवाई के समय रखी जाने वाली प्रमुख सावधानियों से अवगत कराया गया। उन्होंने बताया कि जैसे बीजीय मसाला फसलों के अंकुरण में आने वाली समस्या के निराकरण एवं इन फसलों में प्रयोग किए जाने वाले प्रमुख खरपतवारनासी दवाओं के नाम एवं इनके प्रयोग के सही समय के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई गई। धनिया की प्रमुख बड़े दाने वाली किस्मों की विशेषताएं एवं छोटे दाने वाली किस्मों की विशेषताओं के बारे में बताया गया कि किस प्रकार की किस्में किस उद्देश्य से किसानों को बुवाई करनी चाहिए पर विस्तृत प्रकाश डाला गया।
राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान निदेशालय अजमेर से वर्चुअल माध्यम से जुड़े निदेशक डॉ.एस एन सक्सेना द्वारा बीजीय मसाला फसलों के फसलों के बीजों को उनके संस्थान से किस प्रकार प्राप्त किया जा सकता है एवं उनके संस्थान के विशेषज्ञों द्वारा समय-समय पर बीजीय मसाला फसलों की खेती तकनीकी रूप से किस प्रकार की जाए ताकि अधिक उत्पादन प्राप्त हो पर जानकारी दी गई।
भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान भोपाल के प्रधान वैज्ञानिक डॉ.आनंद विश्वकर्मा द्वारा अधिक गुणवत्ता युक्त उत्पादन किस प्रकार लिया जाए तथा मृदा स्वास्थ्य को अच्छा रखकर पोषक तत्वों के उचित मात्रा में प्रयोग कर अधिक उत्पादन कैसे प्राप्त किया जा सकता है, विषय पर वर्चुअल माध्यम से जानकारी उपलब्ध कराई गई।
गुना मशाला पार्क से कार्यक्रम में आए डिप्टी डायरेक्टर डॉ.भारत अर्जुन गुडाडे ने कहा कि किसानों को जैविक खेती सिक्किम की तर्ज पर कर अधिकतम गुणवत्ता युक्त उत्पादन न्यूनतम खर्चे पर कर प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने स्पाइस पार्क गुना द्वारा बीज वाली मसाला फसलों की गहाई के लिए एक विशेष प्रकार की पॉलिथीन फर्श एवं उनके संस्थान द्वारा किसानों के कच्चे उत्पादों को किस प्रकार सुखा कर पाउडर बनाकर एवं उनमें उपस्थित दवाओं के दुष्प्रभाव की मात्रा जांच कराने की सुविधा भी उपलब्ध है इस विषय में जानकारी दी टीकमगढ़ से आई एफपीओ की अध्यक्ष सुनीता राजा बुंदेला ने एफपीओ पर प्रकाश डाला। शहडोल से कृषक देवीदिन अहिरवार जैविक खेती और हल्दी, टीकमगढ़ के कृषक महेंद्रसिंह ने जैविक खेती और लहसुन व प्याज, खंडवा के बीज प्रमाणीकरण अधिकारी सन्तोष दडिंग ने बीज प्रमाणीकरण पर प्रकाश डाला। कृषक सोपान कापसे एवं कृषक अक्षय जायसवाल ने बुरहानपुर में मसाले एवं प्राकृतिक खेती पर अपनी बात रखी। कृषि विज्ञान केंद्र नीमच के कीट विशेषज्ञ डॉ श्याम सिंह ने लहसुन, अदरक एवं कीट पर अपने अनुभव से अवगत कराया। कृषि विज्ञान केंद्र बड़वानी के डॉ. एसके बड़ोदिया ने प्राकृतिक खेती एवं क्राफ्ट पर, कृषि विज्ञान केंद्र रतलाम के वैज्ञानिक डॉ सर्वेश त्रिपाठी ने मसाला खेती पर प्रकाश डाला। वहीं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद केंद्रीय कटाई उपरान्त अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान लुधियाना के के वैज्ञानिक डॉ.संदीप पी दवांगे ने कटाई के उपरांत उपयोग की जाने वाली मशीनों एवं संयंत्रों पर विस्तृत जानकारी दी। बीजीय अनुसन्धान केंद्र अजमेर के मुकेश कुमार, रवि वाय एवं महेंद्र कुमार ने मसालों से जानकारी एवं मसाला समाग्री का प्रदर्शन किया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान अटारी जबलपुर के निदेशक डॉ.एसआरके सिंह ने संबोधित किया। राष्ट्रीय कार्यशाला के समापन अवसर पर देशभर से आए विषय विशेषज्ञों एवं वैज्ञानिकों तथा अन्य जिलों से आए कृषकों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपसंचालक मनोहर देवके ने आभार प्रदर्शन किया
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