"पुस्तकदान-महादान" पालक महासंघ का अभियान पाठयक्रम यथावत रखने की मांग

बुरहानपुर। पालक महासंघ प्रदेश स्तरीय पालको का सामाजिक संगठन है जो प्रदेश अध्यक्ष कमल विश्वकर्मा एवं प्रदेश महासचिव प्रबोध पंडया के नेतृत्व मे पुरे प्रदेश मे "पुस्तक दान महादान"  ऐसा अभियान चला रही हे। इसी तारतम्य मे अभियान को सार्थक करने एवं पर्यावरण संरक्षण को बढावा देने के लिए जिला बुरहानपुर इकाई व्दारा मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के नाम डिप्टी कलेक्टर हेमलता सोलंकी को ज्ञापन दिया गया। इस बारे मे अधिक जानकारी देते हुए पालक महासंघ जिला इकाई बुरहानपुर अध्यक्ष राजेश भगत ने बताया प्रतिवर्ष परिक्षा समाप्ति पर विद्यार्थीयो की पुरे प्रदेश मे न जाने कितने टन किताबे रद्दी मे चले जाती है। अगर विद्यार्थी अपनी पुस्तके दान करे तो एक तरह से एक दुसरे कि सहायता के साथ कागज बनाने के लिए उपयोग होने वाले पेडो की कटाई को रोका जा सकता है जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा मे महत्वपुर्ण कदम होंगा।
पालक महासंघ उपाध्यक्ष धर्मेन्द्र सोनी ने कहा पिछले लगभग दो वर्ष कोरोना महामारी के कारण स्कूले लगभग बंद रही या ऑनलाइन पढाई हुई। उसके बाद अब महामारी का प्रकोप समाप्त होने पर स्कुले ऑफलाइन शुरू हो गई है। वर्ष 2022 में लोकहित मे पालक महासंघ बडे पैमाने पर पुस्तकदान महादान अभियान चला रहा लेकिन कुछ निजी स्कुल जो प्राइवेट पब्लिशर की किताबो से स्कुलो मे पढाते है वह किताबो के कमिशन के इरादतन सम्भव है पाठयक्रम मे बदलाव कर दे जिससे विद्यार्थी जो अपनी पुरानी पुस्तकेदान कर रहे है वह स्कुलो व्दारा पाठयक्रम मे बदलाव के कारण उपयोगी नही रहेंगी इसलिए संगठन ने इस वर्ष निजी स्कुलो मे पाठ्यक्रम यथावत रखने की मांग की है। पदाधिकारी अताऊल्ला खां ने कहा छात्रो और उनके पालको को नवीन पुस्तके खरीदने का आर्थीक भार ना वहन करना पडे इस दिशा मे यह जरुरी है। महासचिव मुकेश दुम्बवानी ने अपनी बात रखते हुए बताया इसके अलावा जिले की कुछ निजी स्कुले जिनका प्रदेश मे शिक्षा के क्षेत्र मे अपनी ख्याति है वह संस्थान भी प्राप्त जानकारी अनुसार  NCERT की किताबो से छात्रो को अध्ययन करा कर बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत कर रही है और अधिकतर निजी स्कुले प्राइवेट पब्लिशर की किताबे भी स्कुलो मे चला रही है जो बहुत महंगी होती है, जिससे छात्रो और उनके पालको पर अनावश्यक आर्थीक बोझ पडता है। पालक महासंघ आगामी शिक्षा सत्र मे NCERT की किताबो से समस्त निजी स्कुलो मे अध्ययन कराया जाय ऐसी लोकहित मे मांग करती है।

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