रात में छोटे बच्चों को अक्सर होता है पेट दर्द (कोलिक पैन) क्या है कारण ? इसे कैसे पहचाने ? कैसे करें घरेलू इलाज ?


समस्या के कारण (Colic Problem Causes)

कॉलिक की वजह अकसर लेक्टोज इनटोलरेंस को माना जाता है। रोते वक्त या दूध पीते वक्त अकसर बच्चे के मुंह के जरिए खूब सारी हवा उसके पेट में पहुंच जाती है। इससे उसे परेशानी होती है। आमतौर पर यह समस्या दोपहर या शाम को ज्यादा परेशान करती है।

कैसे पहचानें 

यह समस्या नवजात शिशुओं में शुरुआती 3 महीने में ज्यादा देखी जाती है। बच्चा जब अपने घुटने मोड़कर छाती तक ले आए और रोते-रोते उसका चेहरा लाल हो जाए, तो आप अनुमान लगा सकती हैं कि ऐसा कॉलिक के कारण हो सकता है। ऐसी स्थिति में उसके पेट में ब्लॉटिंग भी नजर आ सकती है।

बच्‍चा लगातार रोने और चिल्‍लाने लगता है

रात को रोना और सो नहीं पाना 

रोते समय हाथ पैर उठाना और मुठ्ठी बंद करना

चेहरे का रंग बदल जाना यानि चेहरे का लाल पड़ना

दूध न पीना और चिड़चिड़ापन

घरेलू उपचार

शिशु को कॉलिक की पीड़ा से राहत दिलाने के लिए ये उपाय अपनाए जा सकते हैं-

सही पोजिशन में दूध पिलाएं

दूध पिलाते वक्त शिशु को अपराइट पोजिशन में यानी मुंह ऊपर की तरफ जरा उठाकर रखें। उसे सुलाकर दूध ना पिलाएं। अगर बच्चा कॉलिक से परेशान है तो उसे जरा हिलाएं-डुलाएं और अपने पास रखें। सुविधा हो तो उसे गोद में लेकर जरा इधर-उधर घुमाएं। मूवमेंट्स से उसे राहत मिलती है।

कंधे-पीठ पर हल्की थपकियां दें-

बहुत ज्यादा रोने के तुरंत बाद बच्चे को दूध नहीं पिलाना चाहिए। दूध पिलाते वक्त और दूध पिलाने के बाद शिशु को कंधे और पीठ पर हल्की थपकियां देकर डकार दिलानी चाहिए। इससे उसे कॉलिक होने की आशंका कम होगी।

मेडिसिन या शुगर सॉल्यूशन दें

बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेकर कॉलिक से बचाने के लिए शिशु को कॉलिक ड्रॉप दे सकती हैं। कई महिलाएं आयुर्वेदिक मेडिसिन (ग्राइप वाटर) का भी प्रयोग करती हैं। इसके अलावा कुछ रिसर्च बताते हैं कि शुगर सॉल्यूशन की अल्प मात्रा भी बेबी को आराम दे सकती है। एक कप गुनगुने पानी में 3 छोटे चम्मच चीनी मिला दें। इसे ठंडा होने दें। इसे दिन में एक या दो बार दूध पिलाने से पहले बच्चे को पिलाएं। लेकिन इस संबंध में चिकित्सक से सलाह जरूर लें। साथ ही यह ध्यान रखें कि अगर शिशु के दांत आ गए हैं, तो शुगर सॉल्यूशन के प्रयोग से बचें। चीनी उसके दांतों के इनेमल को नुकसान पहुंचा सकती है।

बेबी का ध्यान भटकाएं

वैसे तो यह समस्या आमतौर पर कुछ ही समय में अपने आप ठीक हो जाती है। अगर बच्चा कॉलिक की वजह से रोए, तो शिशु को शांत करने के लिए उसका ध्यान दूसरी चीजों में बंटा सकती हैं। उसे किसी बच्चे के साथ खेलने, चमकीली लाइट, खिलौना में व्यस्त करने की कोशिश करें। इसके अलावा आप चाहें तो उसे शांत करने के लिए पैसीफायर दे सकती हैं। बाजार में इसकी तमाम वैराइटीज मौजूद हैं, जिनमें से आप अपने शिशु के लिए अच्छी गुणवत्ता और फ्लेवर वाला पैसीफायर चुन सकती हैं। शिशु को शांत वातावरण में रखने से भी उसे राहत मिलती है।

सही बॉटल यूज करें

बेबी को बोतल से दूध पिलाते समय छोटी का ही प्रयोग करें। इससे शिशु के पेट में बोतल की हवा नहीं पहुंचेगी। यह भी ध्यान रखें कि निप्पल से दूध का फ्लो धीमा आए। तेज फ्लो से दूध पीने पर शिशु के पेट में हवा पहुंच सकती है।

इन बातों का भी रखें ध्यान

जो मांएं ब्रेस्टफीड करवाती हैं, उन्हें अपनी डाइट का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्हें ऐसा कुछ नहीं खाना चाहिए, जिससे बच्चे के पेट में गैस बने और उसे कॉलिक की प्रॉब्लम हो सके। दरअसल, कई बार बेबी को ब्रेस्टफीडिंग करवाते हुए अनजाने में मां अपने दूध के माध्यम से शिशु के पेट में वायु उत्पन्न करने वाले तत्व पहुंचा देती हैं। इससे बचने के लिए मां को बेक्ड प्रोडक्ट, बींस, प्याज आदि खाद्य पदार्थ खाने से बचना चाहिए।

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