श्याम बेनेगल (Shyam Benegal) एक ऐसे मशहूर फिल्ममेकर के तौर पर जाने जाते हैं जिनकी फिल्में यथार्थ और समाज की सच्चाई रुपहले पर्दे पर पेश करती हैं. श्याम बेनेगल 14 दिसंबर 1934 में सिंकदराबाद के त्रिमुलघेरी में पैदा हुए थे. फिल्म डायरेक्टर, स्क्रीन राइटर और डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर श्याम को पैरलल सिनेमा का अगुवा माना जाता है. 70 के दशक में श्याम बेनेगल ने उन विषयों पर फिल्म बनाने का फैसला किया जिसे छूने से दूसरे फिल्म निर्माता कतराते थे. श्याम बेनेगल की काबिलियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपने फिल्मी करियर की पहली 4 फिल्मों को खुद डायरेक्ट किया और खुद ही लिखा भी था. फिल्ममेकर आज अपना 87वां जन्मदिन मना रहे हैं.
श्याम बेनेगल की पहली फिल्म ‘अंकुर’
श्याम बेनेगल के नाम असंख्य पुरस्कार है. श्याम को एक दो नहीं बल्कि 18 बार नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिल चुका है. पद्मश्री, पद्मभूषण, दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित श्याम की फिल्मों की खासियत ये थी कि हीरो अक्सर निचले तबके से होता था. श्याम बेनेगल की फिल्में सिनेमाघर में बैठे दर्शकों का नजरिया बदल कर रख देती थी. श्याम ने सन 1974 में सबसे पहले फिल्म ‘अंकुर’ बनाई थी. इस फिल्म से ही दिग्गज एक्ट्रेस शबाना आजमी ने फिल्मी पर्दे पर कदम रखा था. जमींदारी प्रथा पर चोट करती इस फिल्म की जबरदस्त सराहना हुई.
श्याम बेनेगल ने दिए दिग्गज कलाकार
शबाना आजमी, स्मिता पाटिल, नसीरुद्दीन शाह, ओम पुरी, अमरीश पुरी, अनंत नाग जैसे बेहतरीन कलाकार श्याम बेनेगल ने भारतीय सिनेमा को दिए. फिल्मों के अलावा दूरदर्शन पर आने वाला प्रसिद्ध धारावाहिक ‘भारत एक खोज’ और ‘कहता है जोकर’, ‘कथा सागर’ को श्याम बेनेगल ने डायरेक्ट किया था.
सिनेमा के नए आयाम से दर्शकों का परिचय करवाया
श्याम बेनेगल ने अपने गुरू सत्यजीत रे और देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर डॉक्यूमेंट्री भी बनाई है. अमरीश पुरी ने अपनी आत्मकथा ‘एक्ट ऑफ लाइफ’ में श्याम बेनेगल को एक चलता फिरता विश्वकोष बताया है. ‘अंकुर’ के अलावा ‘मंथन’, ‘कलयुग’, ‘मम्मो’, ‘सरदारी बेगम’, ‘सूरज का सातवां घोड़ा’, ‘जुबैदा’, ‘वेलकम टू सज्जनपुर’ जैसी फिल्में बनाकर दर्शकों को सिनेमा के नए आयाम से रुबरू करवाया है.
श्याम बेनेगल की फैमिली में पत्नी नीरा बेनेगल हैं और बेटी पिया बेनेगल हैं. श्याम की बेटी पिया एक फेमस कास्ट्यूम डिजाइनर हैं.