* पीटी उषा भारत की एक मशहूर महिला एथलीट है
* पीटी उषा उड़न परी के नाम से मशहूर है
* पीटी उषा का पूरा नाम पिलावुळ्ळकण्टि तेक्केपरम्पिल् उषा है
* पीटी उषा का जन्म 27 जून 1964 केरल के कोझीकोड ज़िले के पय्योली ग्राम में हुआ था
* पीटी उषा का बचपन बहुत ही गरीबी में बीता
* उषा को बचपन में तेज चलने का शौक था वह कहीं भी तपाक से पहुंच जाती थी
* मामा के प्रोत्साहन पर पीटी उषा ने मात्र 13 वर्ष की आयु में वह स्कूल की एक दौड़ प्रतियोगिता में भाग ली
* सबसे छोटी उषा ने कुछ ही सेकंड में इस प्रतियोगिता को जीतकर अपने करियर की पहला पड़ाव पास किया
* इस प्रतियोगिता में एक रिकॉर्ड बना जिससे सभी अनजान थे पी टी उषा नेशनल रिकॉर्ड तोड़ चुकी थी
* इसके बाद उषा को 250 रुपये मासिक छात्रवृति मिलने लगी जिससे वो अपना गुजारा चलाती
* 1979 में पी. टी. उषा ने राष्ट्रीय विद्यालय प्रतियोगिता में भाग लिया जहाँ बड़े बड़े लोग जानी मानी हस्तियां खेल देखने आई हुई थीं उन खेलों में उषा ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया
* इस प्रतियोगिता में कोच ओ. ऍम. नम्बियार की नजर उनपर पड़ी तो उन्होंने पहली ही नजर में उषा में छिपी प्रतिभा को पहचान लिया
* ओ. ऍम. नम्बियार ने उषा को अच्छा प्रशिक्षण देना शुरू किया लगातार प्रयास से उषा अब इस काबिल हो चुकी थीं कि वह ओलम्पिक में भाग ले सकें
* 1980 में उषा ने मास्को ओलम्पिक में भाग लिया लेकिन पहली बार में वो ज्यादा सफल नहीं हो पायीं
* 1982 के ओलंपिक में उषा ने 100 मीटर और 200 मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया
* लोगों को ये जान के विश्वास ही नहीं होता था कि भारत की दुबली पतली उषा ओलंपिक में सेमीफ़ाइनल की रेस जीतकर अन्तिम दौड़ में पहुँच सकती हैं
* 1984 के लांस एंजेल्स ओलंपिक खेलों में भी चौथा स्थान प्राप्त किया था यह गौरव पाने वाली वे भारत की पहली महिला धाविका हैं
* 'ट्रैक एंड फ़ील्ड स्पर्धाओं’ में उषा ने 5 स्वर्ण पदक और एक रजक पदक जीता और बन गयीं एशिया की सर्वश्रेष्ठ धाविका
* कुवैत में एशियाई ट्रैक और फ़ील्ड प्रतियोगिता में एक नए एशियाई कीर्तिमान के साथ उन्होंने 400 मीटर में स्वर्ण पदक जीता
* पी टी उषा अब तक 100 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुकी हैं
* 1985 में उन्हें पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया
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