देश की पहली महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी

सुचेता कृपलानी
* आजादी के आंदोलन में जिन महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था, उनमें से एक थीं सुचेता कृपलाणी
* उनको देश की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ
* उनका जन्म 25 जून, 1908 को बंगाल के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था
* इनके पिता सरकारी डाक्टर थे तथा परम देशभक्त थे और सुचेता को देशभक्ति अपने पिता से विरासत में मिली
* छात्र जीवन में सुचेता मेधावी छात्रा थीं उन्होंने नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ कॉलेज से अपना हायर एजुकेशन पूरा किया
* उन्होंने सेंट स्टीफंस कॉलेज से हायर स्टडी की उसके बाद वह बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) में संवैधानिक इतिहास की लेक्चरर बन गईं
* जब 28 साल की थीं तो समाजवादी नेता आचार्य जे.बी.कृपलाणी से मिलीं जिनसे उनको प्यार हो गया बाद में दोनों ने शादी कर ली
* जे.बी.कृपलाणी उनसे 20 साल बड़े थे परिवार के साथ शुरू में महात्मा गांधी ने भी उनकी शादी का विरोध किया था
* आचार्य कृपलाणी पक्के गांधीवादी थे उन्होंने खुद गांधीजी से सुचेता को मिलवाया और उनको स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया
* वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गईं
* 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान अरुणा आसफ अली और अन्य महिला नेताओं के साथ उन्होंने आगे आकर मोर्चा संभाला
* वह कांग्रेस पार्टी की महिला मोर्चा की पहली अध्यक्ष बनी
* उनके समर्पण को देखते हुए गांधीजी ने 1946 में कस्तूरबा गांधी नैशनल मेमोरियल ट्रस्ट की आयोजक सचिव नियुक्त होने में उनकी मदद की
* सुचेता गांधी जी के साथ नोआखली (अब बांग्लादेश) में हुए भयंकर सांप्रदायिक दंगे में पीड़ितों की सेवा की
* उनकी प्रतिभा को देखते हुए भारत के संविधान का चार्टर तैयार करने वाली उप कमिटी में उनको जगह मिली
* 1949 में सुचेता कृपलाणी को संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रतिनिधि के तौर पर चुना गया
* नेहरू से मनमुटाव के बाद सुचिता ने नई पार्टी कृषक मजदूर प्रजा पार्टी बनाई लेकिन बाद में फिर से कांग्रेस में शामिल हो गई
* 1952 में अपनी पार्टी से नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र से चुनाव जीत लघु उद्योग राज्य मंत्री बनी
* 1962 में कानपुर विधानसभा से चुनाव जीत यूपी में कैबिनेट मंत्री बनी
* 1963 में सुचेता उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी इसके साथ ही वह देश की पहली महिला मुख्यमंत्री बन गई
* 1967 तक वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रही और 1971 में राजनीति को अलविदा कह दी
* 1 दिसंबर 1974 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हुआ

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