बूस्टर खुराक के बजाय दी जाएगी प्रीकॉशन डोज
भारत में ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों के बीच वैक्सीन की तीसरी खुराक की आवश्यकता पर चर्चाएं तेज हैं। ऐसे में बूस्टर डोज जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जा रहा है। लेकिन जब पीएम मोदी ने देश को संबोधित करते हुए फ्रंटलाइन वर्क्स को 'बूस्टर खुराक' के बजाय 'प्रीकॉशन डोज' शब्द का इस्तेमाल किया। प्रीकॉशन खुराक के तौर पर बूस्टर डोज दे रही है।
क्या है बूस्टर डोज?
सबसे पहले हमें बूस्टर डोज के बारे में जानना होगा। कोरोना वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी तैयार करने के लिए दुनियाभर में बनी ज्यादातर वैक्सीन की दो डोज देने की जरूरत है। वैक्सीन डोज लगने से इम्यूनिटी का स्तर बढ़ जाता है। अलग-अलग कंपनियां इसे लेकर अलग-अलग दावे करती हैं। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि ये बूस्टर डोज उन्हीं लोगों को दी जाती है जिनकी इम्यूनिटी कम या एंटीबॉडीज कम बनती हैं। बूस्टर डोज म्यूनिटी पावर को बढ़ाती है।
प्रीकॉशन डोज क्या है?
पीएम नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए बूस्टर डोज नाम का इस्तेमाल न करते हुए प्रीकॉशन डोज का जिक्र किया। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दूसरी खुराक और प्रीकॉशन डोज के बीच 9 से 12 महीने का अंतर हो सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे प्रीकॉशन डोज 2022 नाम दिया है, जो 60 साल से अधिक उम्र के लोगों जो कुछ अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं और फ्रंट लाइन वर्कर्स को 10 जनवरी से लगेगा।
सरकार की कॉमोर्बिटिज लिस्ट में 22 बीमारियां शामिल हैं।
ये 22 बीमारियां हैं लिस्ट में -
- डायबिटीज, किडनी डिजीज या डायलिसिस
- कार्डियोवैस्कुलर डिजीज
- स्टेमसेल ट्रांसप्लांट
- कैंसर
- सिरोसिस
- सिकल सेल डिजीज
- प्रोलॉन्गड यूज ऑफ स्टेरॉयडस
- इम्यूनोसप्रैसेंट ड्रग्स
- मस्कुलर डिस्ट्रॉफी
- रेसपिरेटरी सिस्टम पर एसिड अटैक
- हाई सपोर्ट की जरूरत वाले विकलांग
- मूकबधिर-अंधापन जैसी मल्टीपल डिसएबेलिटिज
- गंभीर रेसपिरेटरी डिजीज से दो साल अस्पताल में रहें हों