सायनस बीमारी क्या होती है ? इसके क्या क्या लक्षण होते हैं ? इससे बचने के क्या उपाय हैं ?


साइनस क्या होता है ? :

साइनस को आमतौर पर सांस की बीमारी या इंफेक्शन से होने वाली बीमारी माना जाता है, जबकि ये नाक की एक गंभीर बीमारी है। जिसमें नाक की हड्डी बढ़कर तिरछी हो जाती है। जिससे सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। साइनस से पीड़ित व्यक्ति को ठंडी हवा, धूल और धुएं के संपर्क में आने से परेशानी बढ़ जाती है।

दरअसल सांस लेने पर हवा हमारे श्वास नली के जरिए मस्तिष्क में जाकर एक थैलीनुमा नली से होकर फेफड़ों तक जाती है। यह थैली, हवा के साथ आई गंदगी यानि धूल, धुएं और दूसरी गंदगियों को शरीर में जाने से रोकती है। लेकिन जब साइनस का मार्ग रुक जाता है, तो इससे बलगम निकालने में दिक्कत होती है। जिसे साइनोसाइटिस नामक बीमारी भी कहा जाता है।

इसके अलावा साइनस में इंफेक्शन होने पर नाक की झिल्ली में सूजन आ जाती है और लंबे समय तक इलाज न मिलने पर उसमें मवाद या बलगम आदि भर जाता है और साइनस बंद हो जाते हैं। जिससे सांस लेना काफी मुश्किल हो जाता है।

साइनस के कारण :

एक्सपर्ट के मुताबिक साइनस होने के मुख्य कारण...

1. बैक्टीरिया

2. फंगल इंफेक्शन

3. नाक की हड्डी का ढ़ेडा होना।

4. प्रदूषण

साइनस होने के अन्य कारण-

1. जिन लोगों को श्वसन नली में जुखाम जैसी संक्रमण पहलें भी हो चुका है वे भी साइनस के खतरे में आते है.
2. यदि नाक में रोगाणुओं पैदा हो जाते हों, जिससे नाक की नली में सूजन हो जाती है.
3. जिनकी किसी बीमारी की वजह से या किसी बीमारी के इलाज की वजह से रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो गयी हो.
4. दांत में संक्रमण होने से साइनस संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.
5. जो धूल, पराग और जानवरों के बाल आदि से एलर्जी से पीड़ित हैं.
6. जिनकी नाक की अंदरूनी वनावट ठीक न हो. सेप्टम एक प्रकार की हड्डी है, जो आपके नाक में उपस्थित होती है. यह हड्डी नाक को दो भागों में विभाजित करती है. अगर किसी चोट की वजह से या
7. प्राकृतिक रूप से सेप्टम एक तरफ ज्यादा जमा हो जाती है, तो साइनसाइटिस या अन्य संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.
8. धूम्रपान भी एक प्रमुख कारण माना जाता हैं.
9. जो अस्थमा से पीड़ित हो, क्योंकि अस्थमा और क्रोनिक साइनसाइटिस होने के बीच में सम्बन्ध होता है.

साइनस के लक्षण :

1. सिर में तेज दर्द होना

2. बुखार रहना

3. नाक से कफ आना

4. खांसी या कफ जमना

5. दांत में दर्द रहना

6. नाक से सफेद हरा या फिर पीला कफ निकलना

7. चेहरे पर सूजन आना

8. कोई गंध न आना

9. साइनस की जगह दबाने पर दर्द

साइनस के उपचार :

1. अगर आपको साइनस की वजह से सिरदर्द और सांस लेने में परेशानी महसूस कर रहे हैं, तो ऐसे में प्याज को धोकर कद्दूकस करके उसका रस निकालकर पानी में मिलाकर उबाल लें। फिर प्याज वाले पानी से कुछ देर भाप लेकर सो जाएं। इससे कुछ देर में आपकी बंद नाक खुल जाएगी।

2. साइनस के उपचार में तेल का उपयोग करना बेहद फायदेमंद होता है। आमतौर पर साइनस को ठीक करने के लिए पुदीने, नींबू और लौंग के तेल का इस्तेमाल किया जाता है। नियमित रूप से इन तेलों को गर्म करके सीने, नाक और सिर पर मसाज करने से राहत मिलती है। इन खास तेलों को घर में भी आसानी से बनाया जा सकता है। इसके लिए नारियल या जैतून के तेल में पुदीना पत्ती या नींबू के छिलकों डालकर गर्म करें या धूप में लगातार 1 सप्ताह रखें।

3. साइनस को दूर करने के लिए गर्मागर्म चाय पीना भी बेहद असरदार उपाय है। इसके लिए अदरक, तुलसी, लौंग और इलायची वाली चाय पीने से न सिर्फ बंद नाक खुलती है बल्कि सर्दी जुकाम और सिरदर्द में भी राहत मिलती है।

4.साइनस की समस्या से छुटकारा पाने के लिए टमाटर भी कारगर होता है। टमाटर, लहसुन,नमक एक मिक्सर में डालकर पेस्ट बना लें, फिर पानी डालकर एक उबाल आने तक पका लें फिर काली मिर्च पाउडर मिलाकर गर्मागर्म सूप का सेवन करें।

5.अगर आप साइनस की कड़वी दवाईयों और नोजल का इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं, तो ऐसे में रोजाना लहसुन की 1-2 कलियों का सेवन करें या गर्मागर्म सूप बनाकर पीएं। लहसुन में एंटी फंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। जिससे इंफेक्शन को आसानी से दूर किया जा सकता है। 


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