जब हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम एलर्जन के खिलाफ ओवररिएक्ट करता है, इस कारण से कुछ लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो जाती है। इसे एलर्जिक अस्थमा के नाम से जाना जाता है।
कुछ एलर्जन जैसे कि पॉलेन यानी परागकण, तंम्बाकू का धुआं, वायु प्रदूशण, तीव्र गंध, धूल, अंडे, पीनट्स, फिश, कॉकरोच आदि भी एलर्जिक अस्थमा या एलर्जी-इंड्यूस्ड अस्थमा का कारण बन सकते हैं।
एलर्जिक अस्थमा के लक्षण -
सांस लेने में घरघराहट (wheezing)
पित्ती ( hives)
मुंह और जीभ पर सूजन
एनाफिलेक्सिस (anaphylaxis)
खांसी
सीने में जकड़न
तेजी से सांस लेना
सांस लेने में कठिनाई
आंखों में खुजली
आंखों से पानी आना
नाक से पानी आना
अगर आपको उपरोक्त लक्षणों में से कोई भी लक्षण नजर आएं, तो तुरंत जांच कराएं।
अस्थमा से बचाव के उपाय
● दमा के मरीज को बारिश और सर्दी और धूल भरी जगह से बचना चाहिए।
बारिश के मौसम में नमी के बढ़ने से संक्रमण बढ़ने की संभावना होती है।
● ज्यादा ठण्डे और ज्यादा नमी वाले वातावरण में नहीं रहना चाहिए, इससे अस्थमा के लक्षण बढ़ सकते हैं।
● घर से बाहर निकलने पर मास्क लगा कर निकलें।
● सर्दी के मौसम में धुंध में जाने से बचें।
● ताजा पेंट, कीटनाशक, स्प्रे, अगरबत्ती, मच्छर भगाने का कॉइल का धुआँ, खुशबुदार इत्र से जितना हो सके बचे।
● धूम्रपान करने वाले व्यक्तियों से दूर रहें।
● मछली, गरिष्ठ भोजन, अंडे, तले हुए पदार्थ न खाएँ।
● अस्थमा के रोगियों को प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा वाली चीजों का सेवन कम से कम करना चाहिए।
● कोल्ड ड्रिंक, ठण्डा पानी और ठण्डी प्रकृति वाले आहारों,अधिक मीठा व दही का सेवन नहीं करना चाहिए।
इस प्रकार की जीवनशैली और आहार में बदलाव लाकर दमा के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
Disclaimer : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं। इससे संबंधित किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।
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