जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्री कृष्ण के बाल गोपाल स्वरूप को छप्पन भोग लगाने की परंपरा अधिक प्रचलित है। परंतु बहुत कम लोग हैं जो यह जानते हैं कि आखिर इन्हें छप्पन भोग क्यों लगाया जाता है। आपको बता दें इस बारे में कई तरह की रोचक कथाएं प्रचलित है तो आइए जानते हैं कि भगवान श्री कृष्ण को छप्पन भोग क्यों लगाया जाता है।
इस संदर्भ में जुड़ी एक पौराणिक कथा के अनुसार माता यशोदा बालकृष्ण को 1 दिन में अष्ट पहर भोजन करवाती थी। अर्थात बालकृष्ण दिन में 8 बार भोजन करते थे। एक बार जब इंद्रदेव के प्रकोप से सारे वृक्ष को बचाने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठाया तब लगातार 7 दिन तक भगवान ने ना अन्न जल ग्रहण किया। आठवें दिन भगवान से किसने देखा कि अब इंद्र की वर्षा बंद हो गई है तब सभी ब्रज वासियों को गोवर्धन पर्वत से बाहर निकल जाने को कहा। अपने बेटे को 7 दिन तक भूखा देखकर माता यशोदा को बड़ा कष्टप्रद हुआ तब उन्होंने सभी ब्रज वासियों सहित 7 दिन और अस्तर के हिसाब से 7 गुना 8 यानी कि 56 व्यंजनों का भोग बाल गोपाल को लगाया।
श्रीमद् भागवत कथा के अनुसार गोपिकाओं ने द्वारा भगवान श्री कृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए 1 महीने तक यमुना में स्नान किया तथा मां कात्यायनी की पूजा अर्चना की तब भगवान श्रीकृष्ण उनकी मनोकामना की पूर्ति की सहमति दे दी। इसी खुशी में तथा मनोकामना पूर्ण होने के उपलक्ष्य में उद्यापन स्वरूप गोपिकाओं ने भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग अर्पित किया था।
तो वहीं अन्य मान्यता के अनुसार एक बार भगवान श्री कृष्ण राधा जी के साथ एक दिव्य कमल पर विराजमान थे। कहा जाता है कि उस कमल की तीन परतें होती हैं इसके तहत प्रथम परत में 8 दूसरी में 16 और इसी में 32 पंक्तियां होती हैं। प्रत्येक पंखुड़ी पर एक प्रमुख सखी और मध्य में भगवान विराजते हैं इस तरह कुल पंक्तियों की संख्या 56 होती है यहां 56 संख्या का यही अर्थ है। अतः छप्पन भोग भगवान श्रीकृष्ण अपनी सखियों संग तृप्त होते हैं।
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