क्या आप जानते हैं ?अप्रैल फूल दिवस से जुड़ी लोककथाएँ

अप्रैल फूल की लोककथाऐं -

1. बहुत समय पहले यूनान में “मोक्सर” नामक एक मजाकिया राजा थाl एक दिन उसने सपना देखा कि किसी चींटी ने उसे जिंदा निगल लिया हैl सुबह जब उसकी नींद टूटी तो वह अपने सपने को याद कर जोर-जोर से हंसने लगाl उसकी रानी ने जब उससे हंसने का कारण पूछा तो उसने बताया कि “रात में मैंने सपने में देखा कि एक चींटी ने मुझे ज़िन्दा निगल लिया है।“ यह सुनकर रानी भी हंसने लगीl तभी एक ज्योतिष ने राजा से आकर कहा कि इस सपने का अर्थ है “आज का दिन आप हंसी-मजाक व ठिठोली के साथ व्यतीत करेंl” उस दिन अप्रैल महीने की पहली तारीख थी। अतः उस दिन से हर वर्ष 1 अप्रैल को हंसी-मजाक से भरा दिन के रूप में मनाया जाने लगाl

2. एक अन्य लोक कथा के अनुसार एक अप्सरा ने किसान से दोस्ती की और कहा, “यदि तुम एक मटकी भर पानी एक ही सांस में पी जाओगे तो मैं तुम्हें वरदान दूंगीl” मेहनतकश किसान ने तुरंत पानी से भरा मटका उठाया और पी गयाl जब उसने वरदान वाली बात दोहराई तो अप्सरा बोली, “‘तुम बहुत भोल-भाले हो, आज से तुम्हें मैं यह वरदान देती हूं कि तुम अपनी चुटीली बातों द्वारा लोगों के बीच खूब हंसी-मजाक करोगेl” अप्सरा का वरदान पाकर किसान ने लोगों को बहुत हंसाया और हंसने-हंसाने के कारण हंसी के एक पर्व का जन्म हुआ जिसे हम मूर्ख दिवस के नाम से पुकारते हैंl

3. किसी समय स्पेन का राजा “माउन्टो बेर” थाl एक दिन उन्होंने घोषणा कराई कि जो सबसे सच्चा झूठ लिख कर लाएगा, उसे ईनाम दिया जाएगाl प्रतियोगिता के दिन राजा के पास “सच्चे झूठ” के हजारों खत पहुंचे, लेकिन राजा किसी के खत से संतुष्ट नहीं थाl अंत में एक लड़की ने आकर कहा “महाराज मैं गूंगी और अंधी हूँl” यह सुनकर राजा चकराया और पूछा  “तुम्हारे पास क्या सबूत है कि तुम सचमुच अंधी होl” तब उस लड़की ने बताया कि, “महल के सामने जो पेड़ लगा है, वह आपको तो दिखाई दे रहा है, लेकिन मुझे नहीं दिखाई दे रहा हैl” इस बात पर राजा खूब हंसा। उसने लड़की को झूठे मजाक का ईनाम दिया और प्रजा के बीच घोषणा करवाई कि अब हम हर वर्ष पहली अप्रैल को मूर्ख दिवस मनाएंगेl तब से आज तक यह परम्परा चली आ रही हैl

4. ईसा पूर्व एथेंस नगर में चार मित्र रहते थे। इनमें से एक अपने को बहुत बुद्धिमान समझता था और दूसरों को नीचा दिखाने में उसको बहुत मजा आता थाl एक बार तीनों मित्रों ने मिल कर एक चाल सोची और उस से कहा कि कल रात में एक अनोखा सपना दिखायी दिया। सपने में हमने देखा कि एक देवी हमारे समाने खड़ी होकर कह रही है कि कल रात पहाड़ी की चोटी पर एक दिव्य ज्योति प्रकट होगी और मनचाहा वरदान देगी, इसलिए तुम अपने सभी मित्रों के साथ वहाँ ज़रूर आनाl

अपने को बुद्धिमान समझने वाले उस मित्र ने उनकी बात पर विश्वास कर लियाl निश्चित समय पर वह पहाड़ की चोटी पर पहुँच गया साथ ही कुछ और लोग भी उसके साथ यह तमाशा देखने के लिए पहुँच गए और जिन्होंने यह बात बताई थी वह छिप कर सब तमाशा देख रहे थेl धीरे धीरे भीड़ बढ़ने लगी और आकाश में चन्द्रमा और तारे भी चमकने लगे पर उस दिव्य ज्योति के कहीं दर्शन नहीं हुए और न ही उनका कहीं नामों निशान दिखाl कहते हैं कि उस दिन 1 अप्रैल था और उस दिन के बाद से एथेंस में हर वर्ष मूर्ख बनाने की प्रथा चल पड़ीl बाद में धीरे धीरे दूसरे देशों ने भी इसको अपना लिया और अपने जानने वाले चिर-परिचितों को 1 अप्रैल को मूर्ख बनाने लगे। इस तरह मूर्ख दिवस का जन्म हुआ।

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