डॉ. अग्रवाल ने बताया कि लम्बे बुखार को टायफायड मानकर अनदेखी ना करें और तुरंत बलगम टेस्ट व एक्सरे करवाएं क्योंकि यह टीबी हो सकती है। बीमारी यह फेफड़ों को प्रभावित करती है लेकिन शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है। बीमारी संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छिकंने व थूकने से फैलती है। टीबी की बीमारी होने पर अधूरी दवाइयां और अधूरा इलाज बीमारी को लाइलाज कर देता है।
रोग के लक्षण
◆ लगातार दो सप्ताह से अधिक खंासी के साथ बलगम आना
◆ बुखार शाम को बढ़ जाना (दो सप्ताह से ऊपर)
◆ बलगम के साथ खून आना
◆ कमजोरी और थकावट महसूस होना
◆ भूख कम लगना
◆ वजन में लगातार गिरावट होना
ऐसे करें बचाव
◆ टीबी के रोगी लगातार व पूरा इलाज लें।
◆ भीड़-भाड़ से बचें, अपने आसपास का वातावरण स्वच्छ रखें
◆ रोगी जहां-तहां न थूकें, इससे यह बीमारी फैलती है
◆ खांसते व छीकतें समय रोगी रुमाल से मुंह व नाक को ढककर रखें
◆ रोगी को धूम्रपान, मदिरा व नशीली वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए