◆ ईसीजी (Electrocardiogram)
गंभीर स्थिति में हार्ट अटैक का पता लगाने के लिए डॉक्टर ईसीजी यानी इलेक्ट्रोकार्ड्रियोग्राम तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। इसमें इलेक्ट्रोड्स को आपकी त्वचा से जोड़कर तरंगों को देखा जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि क्षतिग्रस्त दिल ईसीजी में सामान्य तरंगे दर्ज नहीं करता।
◆ खून की जांच -
अगर हार्ट अटैक से आपके दिल को क्षति पहुंची है तो कुछ एंजाइम जैसे क्रिएटन फोस्फकाइनेज, उससे लीक होकर खून में मिल जाते हैं। डॉक्टर्स आपके खून का सैंपल लेकर इन एंजाइम के होने की पुष्टि कर सकते हैं।
हार्ट अटैक के दौरान या आने के बाद इन टेस्टों से भी इसका पता लगाते हैं -
◆ चेस्ट एक्स रे (Chest X ray) : डॉक्टर्स एक्स-रे के माध्यम से आपके दिल का आकार, रक्त वाहिकाओं की स्थिति और अन्य द्रव्यों और फेफड़ों की स्थिति पता कर सकते हैं।
◆ ईकोकार्डियोग्राम : इस आधुनिक टेस्ट में एक डिवाइस को सीने पर रखकर ध्वनि तरंगें छोड़ी जाती हैं। जो दिल से टकराकर सेंसर में वापस पहुंचती हैं। इन वापस आई तरंगों के आधार पर डिवाइस दिल की वीडियो इमेज तैयार कर देता है।
◆ एंजियोग्राम (Angiogram): इस टेस्ट में नसों में एक लिक्विड डाई इंजेक्ट कर दी जाती है। जो हमारे दिल को खून पहुंचाने वाली धमनियों तक पहुंच जाती है। इस डाई की मदद से नसें एक्स-रे में नजर आने लगती हैं और नसों में रूकावट वाली जगह का पता चल जाता है।
◆ सीटी स्कैन और एमआरआई (CT & MRI) : दिमाग की तरह दिल का भी स्कैन किया जा सकता है। हार्ट अटैक के बाद ये स्कैन उसे पहुंची क्षति के बारे में बताता है।
Tags
स्वास्थ्य समाचार