कैंसर के जोखिम के साथ-साथ बीड़ी पीने वाले लोगों में दिल की बीमारी और दिल का दौरा पड़ने का खतरा सिगरेट पीने वालों के मुकाबले तीन गुणा अधिक होता है।
बीड़ी पीने के कारण वातस्फीति के जोखिम भी बढ़ जाते हैं जो क्रोनिक ब्रोंकाइटिस के जोखिम को चार गुणा बढ़ावा दे सकता है।स्मोकिंग के कारण थायरॉइड ग्रंथि, मेटाबॉलिज्म और शरीर में इंसुलिन की कार्रवाई प्रभावित हो सकती है। जिसके कारण ग्रेव्स हायपरथायरॉइडिज्म, ऑस्टियोपोरोसिस और प्रजनन क्षमता से जुड़े जोखिम गंभीर हो सकते हैं। धूम्रपान की आदत शरीर में इंसुलिन प्रतिरोध के विकास को बढ़ावा देता है जिससे शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ सकती है और टाइप 2 डायबिटीज (मधुमेह) का जोखिम भी बढ़ सकता है।
स्मोकिंग की आदत भविष्य में होने वाले बच्चे के स्वास्थ्य को भी शारीरिक और मानिसक रूप से प्रभावित कर सकता है।
प्रेग्नेंसी के दौरान बीड़ी और सिगरेट पीने से महिला में कैटेकोलामाइन हार्मोन के उत्पादन में वृद्धि होती है, जो कि फाइटोप्लासेंटल यूनिट को फैला सकता है।
स्मोकिंग से खून की नसें प्रभावित होती है जिसका कारण हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है।
शरीर में जाने वाले धुआं खून में फैटी एसिड की मात्रा को बढ़ाता है।
निकोटीन की अधिक मात्रा शरीर में जाने पर सेट्रल नर्वस सिस्टम की उत्तोजना बढ़ सकती है जो बेहोशी का कारण बन सकता है।