बुरहानपुर - यूनानी दिवस पर जानकारी देते हुए भोपाल से सेमिनार में सम्मिलित डॉ. युसूफ खलील ने बताया कि यूनानी चिकित्सा पद्धति यों तो विश्व की सबसे पुरानी उपचार पद्धतियों में से एक है जिसकी शुरुआत ग्रीस (यूनान) से हुई, लेकिन भारत में इसकी शुरुआत बीसवीं सदी में हुई।
यूनानी चिकित्सा का पुनरुत्थान करने का श्रेय हकीम अजमल खान को ही जाता है। पेशे से हकीमों के परिवार में 11 फरवरी 1863 को दिल्ली में जन्मे अजमल खान एक राष्ट्रवादी नेता, विचारक और स्वतंत्रता सेनानी थे।
यूनानी चिकित्सा पद्धति के शोध और अभ्यास के विस्तार से जुड़ी महत्त्वपूर्ण संस्थाओ को बढ़ाने में हकीम अजमल खान की अहम भूमिका रही। उनके अथक प्रयास का ही परिणाम था कि ब्रिटिश शासन में समाप्ति की कगार पर पहुंच चुकी भारतीय यूनानी चिकित्सा प्रणाली में नई ऊर्जा और जीवन का संचार हुआ।
हकीम अजमल खान ने मूल रूप से दवा की यूनानी प्रणाली में 1920 के दशक में अनुसंधान की अवधारणा विकसित की। अपने समय की एक बहुमुखी प्रतिभा, हकीम अजमल खान ने बहुत जल्द ही अनुसंधान के महत्त्व को अनुभव किया। आजादी के बाद भारत सरकार ने इन प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए 1971 में हैदराबाद में यूनानी चिकित्सा पद्धति के लिए केंद्रीय शोध संस्थान (सीआरआइयूएम) की स्थापना की और 2016 में हकीम अजमल खान के जन्मदिवस ११ फरवरी को उनके सम्मान में यूनानी दिवस के रूप में घोषित किया।
डॉ. शेख मो.सादिक और डॉ. फरीद क़ाज़ी ने बताया आज उन्हीं को याद करते हुए बुरहानपुर की सैफिया हमीदिया यूनानी महाविद्यालय में यूनानी मेडिकल प्रोफेशनल एसोसिएशन द्वारा हकीम अजमल खान के जन्मदिवस को मनाया जायेगा साथ ही यूनानी मेडिसिन पर आधारित राष्ट्रीय सेमिनार का भी आयोजन किया जा रहा है,जिसमें देश के विभिन्न स्थानों से यूनानी चिकित्सक सम्मलित हो रहे हैं।
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