एल्कोहल इनटॉक्सिकेशन क्या है? इसके क्या कारण हैं ?

एल्कोहल इनटॉक्सिकेशन उन लोगों को होता है जिन्हें नशा करने की आदत होती है। एल्कोहल इनटॉक्सिकेशन वो स्थिति है जिसमें व्यक्ति बहुत ज्यादा शराब पी लेता है। यह स्थिति अस्थायी होती है लेकिन कभी-कभी यह जानलेवा भी हो सकती है। ज्यादा शराब पीने से शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से नुकसान होता है। इसके लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं। शराब का नशा गंभीर होता है। यह आपके शरीर के तापमान, श्वास, हृदय गति और गैग रिफ्लेक्स को प्रभावित करता है। यह कभी-कभी कोमा या मृत्यु का कारण भी बन सकता है।

एल्कोहल इनटॉक्सिकेशन अस्थायी होने के साथ खतरनाक स्थिति भी है। इसके लिए तुरंत इलाज की जरूरत पड़ती है। अगर लोग ​संयमित रहकर शराब का सेवन करते हैं तो वो इतना नुकसानदायक नहीं होता है। लेकिन लंबे समय तक नियमित रूप से ज्यादा शराब ​पीना आपके ​जीवन को खतरे में डाल सकता है। युवा और वयस्क दोनों एल्कोहल इनटॉक्सिनेशन का अनुभव कर सकते हैं। एल्कोहल इनटॉक्सिनेशन एक मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है।
एल्कोहल इनटॉक्सिकेशन के कारण -
एल्कोहल इनटॉक्सिकेशन में शराब शरीर के स्वाभाविक रूप से होने वाले न्यूरोट्रांसमीटर GABA (गामा एमिनो ब्यूटिरिक एसिड) के प्रभाव को बढ़ा देती है। न्यूरोट्रांसमीटर ऐसे रासायनिक पदार्थ हैं जो तंत्रिकाओं तक संकेत पहुंचाते हैं। एल्कोहल इनटॉक्सिनेशन से दिमाग को मिलने वाले संकेत में बाधा आती है। ज्यादा शराब पीने से मानसिक और शारीरिक गतिविधियां बदल जाती हैं। लंबे समय से शराब पीने वालों में ही ये समस्या ज्यादा देखी गई है। ज्यादा शराब पीने वाले माउथवॉश और कुछ दवाएं भी लेते हैं। इस वजह से भी उन्हें एल्कोहल इनटॉक्सिनेशन की समस्या हो जाती है।

जो पुरुष दो घंटे में पांच या उससे ज्यादा गिलास शराब पी लेता है तो उसे एल्कोहल इनटॉक्सिकेशन हो जाता है। वहीं महिलाओं के साथ ये चार गिलास में ही हो जाता है। ज्यादा शराब पीने के बाद लोग अक्सर बेहोश हो जाते हैं। ऐसे में आपके पेट और आंतों से लगातार शराब रिसती रहती है और शरीर में शराब का स्तर बना रहता है।

जब भोजन पचने में ज्यादा समय लगे और शराब को शरीर जल्दी अवशोषित कर ले तो समझना चाहिए कि आपको एल्कोहल इनटॉक्सिकेशन हो गया है। अगर आप कम समय में ज्यादा शराब पी जाते हैं तो ये आपके लिए खतरनाक है।

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