बुरहानपुर, राजघाट (संवाददाता):
ताप्ती सेवा समिति, बुरहानपुर ने इस वर्ष दीपावली का पर्व भक्ति, स्वच्छता और विचारों के प्रकाश के साथ मनाया।
समिति के सदस्यों ने माँ ताप्ती नदी के पवित्र राजघाट तट पर एकत्र होकर माँ ताप्ती की आरती, पूजा-अर्चना और दीपदान किया,
जिससे ताप्ती तट दीपों की पंक्तियों से आलोकित हो उठा।
“असली प्रकाश बिजली का नहीं, विचार का होता है” – यही रहा कार्यक्रम का केंद्रीय संदेश
समिति ने इस अवसर पर यह संदेश दिया कि
आज जब संसार तकनीक से चमक रहा है और हर दिशा में कृत्रिम रोशनी की बाढ़ है,
तब हमें यह याद रखना चाहिए कि
असली प्रकाश बिजली का नहीं, विचार का होता है —
जो मन को जगमगाता है और समाज को सभ्यता देता है।
हमारे ऋषियों ने कहा था —
“तमसो मा ज्योतिर्गमय” — अर्थात् “अंधकार से प्रकाश की ओर चलो।”
यह प्रकाश बाहर का नहीं, हमारे भीतर के विचारों का है —
जो मनुष्य को संवेदनशील, समर्पित और सजग बनाता है।
भगवान बुद्ध के वचन —
“अप्प दीपो भव” (स्वयं अपना दीप बनो) —
आज भी भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं।
ताप्ती सेवा समिति ने इन्हीं विचारों के साथ
दीपावली पर्व का शुभारंभ माँ ताप्ती के आशीर्वाद से किया।
स्वच्छता, सजावट और सेवा से सजी ताप्ती तट की दीपावली
कार्यक्रम की शुरुआत समिति के सदस्यों द्वारा
ताप्ती तट पर स्वच्छता अभियान से की गई।
सदस्यों ने स्वयं अपने हाथों में झाड़ू लेकर तट की सफाई की,
इसके बाद रंग-बिरंगी रंगोलियाँ बनाई गईं,
और झंडू के फूलों से माँ ताप्ती का मनमोहक द्वार सजाया गया।
आदरणीय तपन पाठक महाराज जी द्वारा
इस सुंदर वातावरण में भजन, आरती और “जय माँ ताप्ती” के जयघोष गूंज उठे।
दीपों की पंक्तियाँ, फूलों की महक और स्वच्छ तट ने
दीपावली को एक अनोखा आध्यात्मिक रूप दिया।
ताप्ती से घरों तक पहुँचा प्रकाश का संकल्प
समिति के सदस्यों ने संकल्प लिया कि
जब तक ताप्ती तट पर प्रकाश और स्वच्छता नहीं फैलेगी,
उनके घरों की दीपावली अधूरी रहेगी।
माँ ताप्ती की आरती के उपरांत ही
सभी सदस्य अपने-अपने घरों में जाकर
माँ लक्ष्मी की पूजा और दीप जलाएँगे। इस अवसर पर श्रीमती सरिता भगत अध्यक्ष धर्मेंद्र सोनी सचिव अभय बालापुरकर पुनीत साकले मोहन दलाल भूपेंद्र जूनागढ़ विवेक हकीम आदि लोग मौजूद थे।
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