गणेश प्रतिमा विसर्जन हेतु इंदौर मॉडल अपनाने की आवश्यकता – ताप्ती सेवा समिति

बुरहानपुर, शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर ताप्ती सेवा समिति, बुरहानपुर द्वारा श्रीराम मंगल कार्यलय में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ शिक्षकों विजय अयरे सर एवं जगदीश हजारी, कपिल मिश्रा, दिनेशचन्द्र कोठारी, सहित शिक्षीका श्रीमती लक्ष्मी शाह, श्रीमती चेतना कोठारी आदि शिक्षकों का सम्मान कर उन्हें समाज में ज्ञान एवं संस्कृति की ज्योति जलाने हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

इस अवसर पर हजारी सर ने विद्यार्थियों और उपस्थित जनसमूह को प्रेरित करते हुए कहा कि “शिक्षा का वास्तविक अर्थ तभी है जब वह समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाए।” उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आस्था और व्यवस्था का संतुलन समाज के लिए आवश्यक है।

इसी संदर्भ में इंदौर जैसे महानगरों में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन हेतु प्रशासन द्वारा की गई पहल को एक उत्तम उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया। इंदौर में प्रत्येक मोहल्ले में पंडाल स्थापित किए जाते हैं, जहाँ लोग अपने घरों की प्रतिमाएँ पूजन-अर्चन के बाद रख देते हैं। इसके बाद नगर निगम द्वारा नियोजित रूप से इन प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है।

यह व्यवस्था—

नदियों और जलस्रोतों पर प्रदूषण और दुर्घटनाओं को कम करती है,

यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाती है,

तथा विसर्जन के समय बिजली बंद होने जैसी वार्षिक समस्याओं से भी राहत देती है।

सचिव धर्मेन्द्र सोनी और युवा सदस्य विवेक हकीम ने अपनी बात में कहा ताप्ती सेवा समिति, बुरहानपुर का मत है कि यदि इस प्रकार का इंदौर मॉडल हमारे शहर में भी अपनाया जाए तो गणेशोत्सव और विसर्जन की प्रक्रिया और अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित एवं पर्यावरण अनुकूल बन सकती है। समिति अध्यक्ष सरिता भगत ने कहा प्रशासन ऐसी व्यवस्था करती है, तब समिति इसके लिए पहल स्वयं की और से करेंगी। 

समिति संरक्षक राजीव खेड़कर और उपाध्यक्ष प्रेमलता सांकले के साथ पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि “समाज और प्रशासन मिलकर यदि इस दिशा में प्रयास करें तो आने वाले समय में बुरहानपुर पूरे प्रदेश के लिए एक आदर्श उदाहरण बन सकता है।” इस अवसर पर आशा तिवारी, मंसूर भाई सेवक, अत्ताउल्लाह खान, जैकी चड्ढा, बसंत पाल, पुनीत सांकले, राजकुमार बचवानी आदि लोग मौजूद थे।

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