बुरहानपुर। देश व दुनिया की एक अभिनव एवं अजूबी ‘‘ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना‘‘ को मध्यप्रदेश कैबिनेट से मंजूरी प्रदान करने पर योजना की सूत्रधार विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) ने मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव सहित समस्त मंत्रिमंडल का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। अब जल्द ही मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच एमओयू हस्ताक्षर होगा।
मध्यप्रदेश तीसरी बड़ी नदी जोड़ो परियोजना से लाभान्वित होगा-सीएम डॉ.मोहन यादव
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजनाओं की स्वीकृति के बाद मध्यप्रदेश तीसरी बड़ी नदी जोड़ो परियोजना से लाभान्वित होगा। यह परियोजना ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना होगी, जिससे महाराष्ट्र राज्य भी लाभान्वित होगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में जल संग्रहण, वॉटर रिचार्ज और सिंचाई क्षेत्र के विस्तार की दिशा में ऐतिहासिक कार्य हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना एक अनूठी परियोजना होगी जो पृथ्वी के गर्भ में जल भंडारण का कार्य भी करेगी। इस परियोजना से जल स्तर ऊपर आएगा। मध्यप्रदेश के खण्डवा और बुरहानपुर जिलों के सवा लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का विस्तार होगा। परियोजना के संबंध में शीघ्र ही महाराष्ट्र के साथ करारनामा किया जाएगा। केन्द्र सरकार से इस परियोजना के संबंध में आवश्यक सहयोग और मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह परियोजना वॉटर रिचार्ज की दृष्टि से पूरे देश के लिए प्रेरक परियोजना सिद्ध होगी।
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि यह महती परियोजना विश्व की अनोखी ग्राउंड वाटर रिचार्ज परियोजना है जिसमें प्रकृति द्वारा निर्मित बजाडा झोन के डिफाल्ट को उपयोग में लाकर माँ ताप्ती के तलहटी में जलभराव की योजना है। 1991 में केंद्रीय भूजल बोर्ड ने 6 वर्षों तक अध्ययन कर इसकी क्रियान्वयन एवं उपयोगिता पर 7 खंडों में विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। वर्ष 2014 में केंद्र में आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार आने के बाद इस परियोजना को गति प्राप्त हुई तथा उन्होंने एक टास्क फोर्स गठित करने हेतु निर्देशित किया। उक्त टास्क फोर्स ने 9 माह के रिकॉर्ड समय में इसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की। डीपीआर तैयार होने के बाद अब परियोजना मूर्तरूप लेने को तैयार है क्योंकि केंद्र में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार है राज्य में हमारे मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी और महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस जी की सरकार है। श्रीमती चिटनिस ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी एवं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस जी ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना को लेकर उत्साहित है।
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने बुरहानपुर सहित महाराष्ट्र के 5 जिलों की जीवन रेखा ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना यह वृहद जल पुनर्भरण योजना मध्यप्रदेश तथा महाराष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण योजना है एवं इससे क्षेत्र के समग्र विकास हेतु जल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। श्रीमती चिटनिस ने ताप्ती कछार में स्थित अदभूत भूजल गर्भीय संरचना के बारे में जानकारी से अवगत कराते हुए कहा ताप्ती कछार में सतपुड़ा पर्वत की तलहटी में ताप्ती नदी तथा सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला के समानांतर ‘‘भूभ्रंश‘‘ (फाल्ट) है। इसी भूभ्रंश से सटकर अत्यंत पाझर (परमेबल) ‘‘बजाड़ा झोन‘‘ पाया गया है। प्रकृति की इस विशेषता के कारण इस क्षेत्र में बरसात के दौरान बहने वाली स्थानीय नदी-नालों का अधिकांश पानी भू-जल को पुनर्भरित करता चलता हैं। भारत सरकार के भू-जल बोर्ड ने इस आश्चर्यजनक फेनोमीनन को देखते हुए संशोधन पुस्तिका प्रकाशित कर बताया है कि ताप्ती के बरसाती बाढ़ के पानी को इस भूभ्रंश से सटकर चलाया जाए तो बड़े पैमाने पर भू-जल रिचार्ज हो सकता है, ऐसा निष्कर्ष भू-जल बोर्ड द्वारा निकाला गया।
*परियोजना देश व दुनिया की एक अभिनव एवं अजूबी*
श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि यह परियोजना देश व दुनिया की एक अभिनव एवं अजूबी परियोजना होने वाली हैं। यह मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र राज्य का संयुक्त उपक्रम है जो केला उत्पाद क्षेत्र के लिए एक वरदान साबित होगी। मेरा ही नहीं बल्कि सभी का दृढ़ विश्वास है कि ऐसी अद्भुत, अद्वितीय एवं आवश्यक परियोजना का क्रियान्वयन सभी के सहयोग से संभव हो सकेगा। इस परियोजना में महाराष्ट्र के धारणी से ताप्ती नदी के दोनों कछार से नहरे बननी है। योजना के तहत 273 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण किया जाएगा। जिससे 11.76 क्यूबिक मीटर जल का पुनर्भरण (रिचार्ज) किया जाएगा। योजना से मध्यप्रदेश के 1,23,082 हेक्टेयर क्षेत्र में एवं महाराष्ट्र के 2,34,706 हेक्टेयर में सिंचाई प्रस्तावित है। दोनों ओर की नहरे ताप्ती कछार में स्थित भूभ्रंश (फाल्ट) के नजदीक से गुजरने वाली है तथा इन नहरों के माध्यम से कंट्रोलेड भूजल पुनर्भरण प्रस्तावित हैं। पुनर्भरण संरचना भू स्तर को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) के वैज्ञानिक निर्धारित करेंगे। इस प्रकार भूगर्भ की संरचना का आधार लेकर लगभग एक लाख करोड़ लीटर (30 टीएमसी) पानी का हर वर्ष पुनर्भरण होना हैं। भारत सरकार के निर्देश पर एवं मध्यप्रदेश व महाराष्ट्र दोनों के निरंतर प्रयास से वापकोस नई दिल्ली कार्यालय द्वारा डीपीआर तैयार की गई। जिसमें मध्यप्रदेश का 1.23 लाख हेक्टेयर एवं महाराष्ट्र का 2.34 लाख हेक्टेयर पुनर्भरण से लाभान्वित होने वाला है तथा 48 हजार हेक्टेयर सीधी सिंचाई से लाभ होगा। जिससे मध्यप्रदेश के बुरहानपुर एवं खंडवा तथा महाराष्ट्र के जलगांव, बुलढाणा, अकोला और अमरावती जिले के क्षेत्र सम्मिलित है। श्रीमती चिटनिस ने कहा इस परियोजना अंतर्गत पुनर्भरण से जलस्तर बढ़ना, भूजल गुणवत्ता सुधार, महाराष्ट्र के विदर्भ के खारपण पट्टा में क्षारों की तीव्रता (डेल्यूशन) कम होकर भूजल उपयुक्तता बढ़ाना, तालाब से सीधी सिंचाई होना एवं पर्यावरण का संरक्षण व संवर्धन होने का ध्येय निश्चित है। इस पर योजना की अनुमानित लागत रु. 19 हजार करोड़ के आसपास है इसका समुचित लाभांश क्षेत्र 3.57 लाख हेक्टेयर है। श्रीमती चिटनिस ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत पूर्व में पारंपरिक भंडारण हेतु 66 टीएमसी क्षमता का जल भराव बाँध प्रस्तावित किया गया था, जिससे 17 हज़ार हेक्टेयर से अधिक भूमि प्रभावित हो रही थी, जिसमें वन भूमि एवं बाघ अभ्यारण की भूमि भी शामिल थी। इसके अलावा 73 गांव की लगभग 14 हजार जनसंख्या भी प्रभावित हो रही थी। अब इस अवरोध को दूर करते हुए पारंपरिक जल भंडारण के स्थान पर भूजल पुनर्भरण योजना द्वारा जल भंडारण प्रस्तावित किया गया है। उन्होंने ने बताया कि ताप्ती मेगा रिचार्ज योजनांतर्गत मुख्य रूप से चार जल संरचनाएं प्रस्तावित हैं। खरिया गुटीघाट बांध स्थल पर लो डायवर्सन वियर:- यह वियर दोनों राज्यों की सीमा पर मध्य प्रदेश की खंडवा जिले की खालवा तहसील एवं महाराष्ट्र की अमरावती तहसील में प्रस्तावित है। इसकी जल भराव क्षमता 8.31 टीएमसी प्रस्तावित है।
दाई तट नहर प्रथम चरण:- प्रस्तावित खरिया गुटीघाट वियर क़े दाएं तट से 221 किलोमीटर लंबी नहर प्रस्तावित है, जो मध्य प्रदेश में 110 किलोमीटर बनेगी। इस नहर से मध्य प्रदेश के 55 हज़ार 89 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी।
बाई तट नहर प्रथम चरण:- प्रस्तावित खरिया गुटीघाट वियर के बाएं तट से 135.64 किलोमीटर लंबी नहर प्रस्तावित है जो मध्यप्रदेश में 100.42 किलोमीटर बनेगी। इस नहर से मध्यप्रदेश के 44 हज़ार 993 हेक्टर क्षेत्र में सिंचाई प्रस्तावित है।
बाईं तट नहर द्वितीय चरण:- यह नहर बाईं तट नहर प्रथम चरण के आर डी 90.89 कि मी से 14 किलोमीटर लम्बी टनल के माध्यम से प्रवाहित होगी। इसकी लंबाई 123.97 किलोमीटर होगी, जिससे केवल महाराष्ट्र के 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई प्रस्तावित है।
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